गैंगेस्टर के नाम पर दलित, पिछड़े, मुसलमानों को मारी गई गोलियां – रिहाई मंच

लखनऊ/मुज़फ्फ़रनगर, 27 मई 2019: खतौली मुज़फ्फरनगर के शहजाद को सहारनपुर में पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने पर परिजनों द्वारा सवाल उठाने के बाद रिहाई मंच के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाक़ात की। प्रतिनिधिमंडल में रविश आलम, आशू चौधरी, इंजीनियर उस्मान, आश मुहम्मद, अमीर अहमद, आरिश त्यागी और साजिद शामिल रहे। मंच ने योगी द्वारा भाजपा की जीत के बाद नए भारत से बनेगा नया उत्तर प्रदेश कहते … पढ़ना जारी रखें गैंगेस्टर के नाम पर दलित, पिछड़े, मुसलमानों को मारी गई गोलियां – रिहाई मंच

क्या सुबोध सिंह की हत्या के पीछे कोई साज़िश थी ?

कल बुलंदशहर में जो लोहमर्षक घटनाक्रम सामने आया है उसके लिए मोब लिंचिंग बड़ा सॉफ्ट सा शब्द लग रहा है अब भीड़ किसी मुसलमान दलित को निशाना नही बना रही है अब उसके हाथ इन्स्पेक्टर रैंक के अधिकारियों तक पुहंच गए है. सारा घटनाक्रम सिर्फ दो घण्टे में ही निपट गया साफ है कि गोकशी की बात अफवाह फैलाकर रास्ता जाम करने की बात इसलिए … पढ़ना जारी रखें क्या सुबोध सिंह की हत्या के पीछे कोई साज़िश थी ?

नज़रिया – फ़र्ज़ी मुठभेड़ें सिर्फ और सिर्फ एक हत्या है

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट, यह शब्द किसने और कहां ईजाद किया है, यह मैं नहीं बता पाऊंगा। पर पुलिस के कुछ मुठभेड़ों की वास्तविकता जानने के बाद, यह शब्द हत्या का अपराध करने की मानसिकता का पर्याय बन गया है। अगर सभी मुठभेड़ों की जांच सीआईडी से हो जाय तो बहुत कम पुलिस मुठभेड़ें कानूनन और सत्य साबित होंगी अन्यथा अधिकतर मुठभेड़ें हत्या में तब्दील हों जाएंगी … पढ़ना जारी रखें नज़रिया – फ़र्ज़ी मुठभेड़ें सिर्फ और सिर्फ एक हत्या है

नज़रिया – कांवरियों की भीड़ पर नियंत्रण अधिक ज़रूरी है न कि पुष्पवर्षा

यातायात नियंत्रण और लोग सड़क पर चल कर सुरक्षित तथा सुव्यवस्थित तरह से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें, इसका तो प्रशिक्षण पुलिस को दिया गया है, पर पुष्पवर्षा का तो कोई पाठ पढ़ाया ही नहीं गया है. पुष्पवर्षा भी उनपर जो उन्हीं कानूनों को तोड़ रहे हैं, और उनके द्वारा, जो उन कानूनों को लागू करने के लिये शपथ बद्ध है। फिर यह नयी प्रथा क्यों? … पढ़ना जारी रखें नज़रिया – कांवरियों की भीड़ पर नियंत्रण अधिक ज़रूरी है न कि पुष्पवर्षा