आईये जानें, क्या है “भारतीय संविधान की प्रस्तावना”

‘हम भारत के लोग’, भारत को लोकतांत्रिक,संप्रभुत्व ,धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों में बांधने वाला भारत का एकमात्र ग्रंथ(संविधान) इन्हीं शब्दों से आरंभ होता है। देश की आत्मा को स्वयं में बसाये संविधान विभिन्नताओं से भरे इस राष्ट्र को एक सूत्र में बंधने का सर्वप्रथम साधन है। संविधान का आरंभ ‘प्रस्तावना’से होता है संविधान के उद्देश्यों को प्रकट करने हेतु यह ‘उद्देशिका ‘ प्रस्तुत की जाती है। … पढ़ना जारी रखें आईये जानें, क्या है “भारतीय संविधान की प्रस्तावना”

देश के लिए धर्मनिरपेक्षता और संविधान का महत्व

एक वक्त वह भी था जहां हम भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र और विभिन्न संप्रदायों के समूहों का देश, के रूप में देख सकते थे और इस बाबत संविधान या किसी और दस्तावेज़ में किसी प्रकार की कोई घोषणा करने की कहीं जरूरत नहीं थी. ना ही किसी प्रकार के आधिकारिक ऐलान की जरूरत थी. हम भारत को हमेशा एक धर्मनिरपेक्ष और सभी आस्था और … पढ़ना जारी रखें देश के लिए धर्मनिरपेक्षता और संविधान का महत्व

संविधान की प्रस्तावना और वर्तमान भारतीय समाज

“हम भारत के लोग भारत को एक संप्रभु , समाजवादी,धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणतंत्र में विधिवत तौर पर गठित करने का संकल्प करते है और इसके सभी नागरिकों के लिए न्याय समाजिक,आर्थिक और राजनीतिक, स्वतन्त्रता-विचार अभिव्यक्ति, विश्वास, निष्ठा तथा पूजा की समानता स्तर तथा अवसर को सुनिश्चित करना और सभी नागरिकों के बीच प्रोत्साहित करना भ्रातत्व तथा व्यक्तिगत गरिमा को सुनिश्चित करना और राष्ट्र की एकता तथा … पढ़ना जारी रखें संविधान की प्रस्तावना और वर्तमान भारतीय समाज