27 मई 1964 – पंडित नेहरु को श्रद्धांजलि देते हुए क्या बोले थे वाजपेयी

27 मई 1964 के दिन जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु हो गयी थी. संसद में भारतीय जनसंघ के नौजवान नेता ,अटल बिहारी वाजपेयी ने 29 मई, 1964 को संसद में उन्हें श्रद्धांजलि दी .उनका भाषण प्रस्तुत है: यह भाषण संसद के रिकार्ड का हिस्सा है. राज्यसभा की 29 मई 1964 की कार्यवाही में छपा है . महोदय, एक सपना था जो अधूरा रह गया, एक … पढ़ना जारी रखें 27 मई 1964 – पंडित नेहरु को श्रद्धांजलि देते हुए क्या बोले थे वाजपेयी

मोदी की जीत भारतीय राजनैतिक चेतना का तीसरा सोपान है

पिछड़ों और दलितों की राजनीति ने 20 साल में ही वह गलती दुहरा दी, जिसे करने में कांग्रेस ने करीब 40 साल लगाए थे. यानी वे उन्हीं पुराने मुहावरों और मुद्दों पर चुनाव लड़ते रह गए जो कब के बासी हो चुके थे और वर्तमान जनमानस की हसरतों से मेल नहीं खाते थे. लोकसभा चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी को मिली 300 से अधिक … पढ़ना जारी रखें मोदी की जीत भारतीय राजनैतिक चेतना का तीसरा सोपान है

क्या है पंडित नेहरू द्वारा सुरक्षा परिषद् की स्थायी सदस्यता ठुकराने का सच?

2014 के थोड़ा पहले ही कांग्रेस के वैचारिक आधार पर संघ और भाजपा से जुड़े लोगों का हमला शुरू हो गया था। इस हमले की जद में तो गांधी भी थे पर गांधी का विराट और वैश्विक व्यक्तित्व इतना अधिक करिश्माई है कि उन को किसी भी मूर्खतापूर्ण प्रलाप से लपेटना संभव नहीं हो पा रहा है । अब आते हैं जवाहरलाल नेहरू पर, जो … पढ़ना जारी रखें क्या है पंडित नेहरू द्वारा सुरक्षा परिषद् की स्थायी सदस्यता ठुकराने का सच?

वो पत्र, जो नेहरु और सरदार पटेल ने एक-दूसरे को लिखा था?

आज सरदार पटेल का जन्मदिन है। आज गुजरात मे उनकी एक विशालकाय प्रतिमा का अनावरण हो रहा है और देश मे एकता दिवस मनाया जा रहा है। कही रन फ़ॉर यूनिटी निकालीं जा रही है तो कहीं उन्हें किसी और तरह से याद किया जा रहा है। आज भारत का जो भौगोलिक स्वरूप हम नक्शे पर देख रहे हैं वह स्वरूप सरदार पटेल का ही … पढ़ना जारी रखें वो पत्र, जो नेहरु और सरदार पटेल ने एक-दूसरे को लिखा था?

जब नेहरू की मौत की खबर सुनकर शेख अब्दुल्ला फूट फूट कर रोये थे.

शेष नारायण सिंह 1947 में कश्मीर का मसला जब संयुक्त राष्ट्र में ले जाया गया तो संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पास हुआ कि कश्मीरी जनता से पूछ कर तय किया जाय कि वे किधर जाना चाहते हैं . भारत ने इस प्रस्ताव का खुले दिल से समर्थन किया लेकिन पाकिस्तान वाले भागते रहे , उस दौर में पाकिस्तान अपनी पूरी ताक़त से कश्मीर में जनमत … पढ़ना जारी रखें जब नेहरू की मौत की खबर सुनकर शेख अब्दुल्ला फूट फूट कर रोये थे.

नेहरू की तरह नरेंद्र मोदी के पास बौद्धिक लोगो का वर्ग नही है

4 साल सत्ता मे रहने के बावजूद नरेंद्र मोदी अपने खुद का मजबूत एलीट वर्ग (अभिजात वर्ग) तैयार करने मे नाकाम रहे हैं। उनके परम्परागत और सोशल मीडिया मे मजबूत समर्थक हैं। उनके पास कुछ बौद्धिक लोग हैं जो उनके समर्थन मे मुख्यधारा के अखबारो मे कालम लिखते हैं। कार्पोरेट वर्ल्ड मे भी उनके वफादार हैं। मिडिल क्लास मे भी ऐसे लोग जो उनकी प्रशंसा … पढ़ना जारी रखें नेहरू की तरह नरेंद्र मोदी के पास बौद्धिक लोगो का वर्ग नही है

देश के लिए धर्मनिरपेक्षता और संविधान का महत्व

एक वक्त वह भी था जहां हम भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र और विभिन्न संप्रदायों के समूहों का देश, के रूप में देख सकते थे और इस बाबत संविधान या किसी और दस्तावेज़ में किसी प्रकार की कोई घोषणा करने की कहीं जरूरत नहीं थी. ना ही किसी प्रकार के आधिकारिक ऐलान की जरूरत थी. हम भारत को हमेशा एक धर्मनिरपेक्ष और सभी आस्था और … पढ़ना जारी रखें देश के लिए धर्मनिरपेक्षता और संविधान का महत्व

जब फ़िरोज़ गांधी ने किया, देश के पहले घोटाले का ख़ुलासा

आज़ाद हिंदुस्तान का पहला वित्तीय घोटाला 1958 में हुआ था. इसे मूंदड़ा घोटाला भी कहा जाता है क्योंकि इसे अंजाम देने वाले का नाम हरिदास मूंदड़ा था. यह पहला घोटाला था जिसमें व्यापारी, अफ़सर और सरकार शामिल थी. इस घोटालें के बारे में रामचंद्र गुहा ने अपनी किताब ‘इंडिया आफ्टर गाँधी’ में विस्तृत रूप से लिखा है, इस आर्टिकल में कुछ संदर्भ उनकी किताब से … पढ़ना जारी रखें जब फ़िरोज़ गांधी ने किया, देश के पहले घोटाले का ख़ुलासा