विचार – प्रेम की ज्योति को जलाने की ज़रूरत है

बदलते परिवेश में बहुत कुछ बदल चुका है संघर्ष के मायने ,सत्य का अर्थ सच्चाई ,अहिंसा सब कुछ अपने अपने वास्तविक अर्थो से परे हो गए है। हिंसा अब अहिंसा का अंग बन गई और असत्य अब सत्य से आगे चलता है। भावना ,संवेदना सिर्फ दिखावे तक ही सीमित है ये सब व्यक्तिगत स्वार्थ के पीछे छुप गए । समय के बंधनों में इस कदर … पढ़ना जारी रखें विचार – प्रेम की ज्योति को जलाने की ज़रूरत है

मुहब्बत में “मैं ” को मारना पड़ता है

मोहब्बत क्या है? किसी को पाना या खुद को खो देना..! इश्क़, मोहब्बत प्रेम इस दुनिया का सबसे दिलचस्प और सबसे भ्रामक विषय है.. जितने लोग उतने एहसास.. उतनी बातें..! प्रेम दुखदायी भी हो सकता है, क्योंकि इससे आपके अस्तित्व को खतरा है.. जैसे ही आप किसी से कहते हैं, ’मुझे तुमसे मोहब्बत है.. वैसे ही आप अपनी पूरी आजादी खो देते हैं.. क्योंकि उस … पढ़ना जारी रखें मुहब्बत में “मैं ” को मारना पड़ता है

कविता – बस स्मृति हैं शेष

अति सुकोमल साँझ- सूर्यातप मधुर; सन्देश-चिरनूतन, विहगगण मुक्त: कोई भ्रांतिपूर्ण प्रकाश असहज भी, सहज भी, शांत अरु उद्भ्रांत… कोई आँख जिसको खोजती थी! पा सका न प्रमाण; युतयुत गान; मेरे प्राण ही को बेधते थे| शांति और प्रकाश, उन्मन वे विमल दृग्द्वय समय की बात पर संस्थित मुझे ही खोजते थे| मैं न था, बस एक उत्कंठा मुझे घेरे खड़ी थी! व्याप्त करती श्वास प्रति … पढ़ना जारी रखें कविता – बस स्मृति हैं शेष