गांधी टोपी का इतिहास

गांधी कैप या गांधी टोपी का सम्बंध भारत के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास से जुड़ा हुआ है। यह एक सामान्य से किश्ती या नाव के आकार की टोपी है जो आज़ादी की लड़ाई के दौरान सुराजी, ( यह शब्द उन सभी सत्याग्रहियों के लिये प्रयुक्त होता था जो गांधी जी के आदर्शों पर अंग्रेज़ो के विरुद्ध लामबद्ध थे, अक्सर प्रयुक्त होता है, ) लोग अपने … पढ़ना जारी रखें गांधी टोपी का इतिहास

व्यक्तित्व – जब बतक़ मियाँ ने बचाई बापू की जान

आज जब के देश महात्मा गांधी जी की 71 वीं बरसी मनाने में मगन है और पूरा सोशल मीडिया गांधी जी को श्रद्धांजली अर्पित कर रहा है,ऐसे समय में एक हस्ती और है जिसको याद किए बग़ैर यह चर्चा ही अधूरी है. मैं बात कर रहा हूं भारत के महान सपूत और स्वतंत्रता सेनानी बत्तख़ मियां की, इस देश की यह विडंबना ही है के … पढ़ना जारी रखें व्यक्तित्व – जब बतक़ मियाँ ने बचाई बापू की जान

कैसे थे महत्मा गांधी और बिड़ला परिवार के सम्बन्ध?

गांधी भी अजीब हैं। जो उनसे नफरत करते हैं वे भी उन जैसा बनना चाहते हैं। वे न उगलते बनते हैं न निगलते। न उन्हें खारिज किये बनता है, न उन्हें अपनाए। खारिज़ करें तो दुनिया सवाल करने लगती है, अपनाएं तो आत्मा की शुचिता और दौर्बल्य आड़े आता है। दुनिया के इतिहास में किसी देश के स्वातंत्रता संग्राम में शायद ही किसी व्यक्ति ने … पढ़ना जारी रखें कैसे थे महत्मा गांधी और बिड़ला परिवार के सम्बन्ध?

व्यक्तित्व – “गोपाल कृष्ण गोखले” को गांधी जी और जिन्ना मानते थे अपना राजनीतिक गुरु

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान स्वतंत्रता सेनानी  रहे गोपाल कृष्ण गोखले की 9 मई को 149 वीं जयंती है.गोपाल कृष्ण गोखले एक स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ ही एक मंझे हुए राजनीतिज्ञ भी थे. गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म 9 मई 1866 ई में  महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिला, तालुका गुहागर के कोथलुक नामक गांव में हुआ था.एक गरीब ब्राह्मण परिवार में जन्में गोखले जी ने … पढ़ना जारी रखें व्यक्तित्व – “गोपाल कृष्ण गोखले” को गांधी जी और जिन्ना मानते थे अपना राजनीतिक गुरु

23 मार्च को शहीद हुए थे “भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु”

23 मार्च 1931.. शहीद दिवस के रूप में जाना जाने वाला यह दिन यूं तो भारतीय इतिहास के लिए काला दिन माना जाता है, पर स्वतंत्रता की लड़ाई में खुद को देश की वेदी पर चढ़ाने वाले यह नायक हमारे आदर्श हैं. इन तीनों वीरों की शहादत को श्रद्धांजलि देने के लिए ही हर साल 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है. 23 मार्च … पढ़ना जारी रखें 23 मार्च को शहीद हुए थे “भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु”

सऊदी क्राऊन प्रिंस ने ऐसा क्यों कहा “मैं गांधी या मंडेला नहीं हूँ”?

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ब्रिटेन के दौरे पर हैं, इसके बाद वो अमेरिका के लिए रवाना होंगे. उन्होंने ब्रिटेन में एक इंटरव्यू दिया है, जोकि काफी चर्चा बटोर रहा है. शहजादे मोहम्मद बिन सलमान ने एक समाचार कार्यक्रम में कहा है कि महिलाएं निश्चित ही पूरी तरह से पुरुषों के समान हैं. वहीं, जब खर्च करने के उनके शाही अंदाज के … पढ़ना जारी रखें सऊदी क्राऊन प्रिंस ने ऐसा क्यों कहा “मैं गांधी या मंडेला नहीं हूँ”?

आखिरी सांस तक अंग्रेज़ों के हाथ नहीं आये थे “आज़ाद”

देश के अमर क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आजाद का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चिरस्मरणीय रहेगा. चन्द्रशेखर ‘आजाद’ आजादी के ऐसे निर्भीक सेनानी थे, जिन्होनें अंग्रेज सरकार के विरुद्ध न केवल क्रान्तिकारी दल का संगठन बनाया, वरन् वे उसके सेनापति भी रहे. भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु बटुकेश्वर दत्त सान्याल उनके क्रान्तिकारी दल के साथी थे. किशोरावस्था से ही अंग्रेजी साम्राज्यवाद का घोर विरोध करने वाले चन्द्रशेखर … पढ़ना जारी रखें आखिरी सांस तक अंग्रेज़ों के हाथ नहीं आये थे “आज़ाद”

गांधीजी के कदम कदम पर साथ देती रहीं कस्तूरबा

कहते हैं कि,’हर सफल व्यक्ति के पीछे किसी महिला का हाथ होता है’, यह बात कस्तूरबा गांधी पर पूर्णतः सत्य साबित होती है. मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी बनाने में कस्तूरबा गांधी का बहुत बड़ा हाथ था. महात्मा गांधी की पत्नी होने के अलावा कस्तूरबा गांधी की अपनी पहचान भी थी.एक समाज सेविका के रूप में उन्होंने खुद की एक पहचान बनाई थी. 11 … पढ़ना जारी रखें गांधीजी के कदम कदम पर साथ देती रहीं कस्तूरबा

लगानबंदी के लिए किया गया था “बारदोली सत्याग्रह”

“सत्याग्रह” जैसे कि नाम से ही अर्थ स्पष्ट है, सत्य के लिए आग्रह. इसका सूत्रपात सर्वप्रथम महात्मा गांधी ने 1894 ई. में दक्षिण अफ़्रीका में किया था. गांधीजी का सत्‍याग्रह कोई आसान काम नहीं है न ही कमजोर लोगों के लिये है.सत्‍याग्रह केवल बहुत ही साहसी व बहादुर लोग ही कर सकते हैं. गांधीजी ने अपने सत्‍याग्रह की परिभाषा कुछ इसी तरह से दी थी … पढ़ना जारी रखें लगानबंदी के लिए किया गया था “बारदोली सत्याग्रह”

जहाँ राष्ट्रपिता ने देश को आजाद कराने की रणनीति बनाई

महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी में स्थित एक मानित राजपत्रित विश्वविद्यालय है. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का इतिहास बड़ा ही अनोखा है.पहले इसे सिर्फ काशी विद्यापीठ ही कहा जाता था,लेकिन बाद में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर इसका नाम “महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ” कर दिया गया. उन्होंने स्वयं यहां पर खुद सूत काता था और एक सप्ताह तक … पढ़ना जारी रखें जहाँ राष्ट्रपिता ने देश को आजाद कराने की रणनीति बनाई

सम्पूर्ण भारत को शिक्षित देखन चाहते थे “डॉ ज़ाकिर हुसैन”

डॉ ज़ाकिर हुसैन स्वतंत्र भारत के तीसरे राष्ट्रपति थे. उनका अधिकांश जीवन शिक्षा को समर्पित रहा. सम्पूर्ण भारत को शिक्षित देखना उनका स्वप्न रहा है. वे पद्म विभूषण और भारत रत्न से सम्मानित किये गए. अपनी योग्यता और प्रतिभा के बल पर उन्होंने एक शिक्षक से लेकर राष्ट्रपति जैसे उच्च पद तक का सफर तय किया. भारतीय राजनीति और शिक्षा के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान … पढ़ना जारी रखें सम्पूर्ण भारत को शिक्षित देखन चाहते थे “डॉ ज़ाकिर हुसैन”

30 जनवरी 1948: इतिहास का वो काला दिन

30 जनवरी भारतीय इतिहास का वह काला दिन है जब देश ने अपने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को खोया था. इसी दिन हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या कर दी गयी थी. गांधी जी की हत्या के पीछे जो भी कारण रहे हो पर सच तो यह है कि देश को इसका बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था. गांधी जी का जाना देश के लिए अपूर्णीय … पढ़ना जारी रखें 30 जनवरी 1948: इतिहास का वो काला दिन

गांधी के साथ,या गांधी के ख़िलाफ़?

एक एक कर बारी बारी चारों गोलियाँ सीने को चीरते हुए उसमे समा गई और महज़ उन बंदूक से निकले बारूद ने एक युग को,एक समाज को और एक विचारधारा को महज कुछ गोलियों से ढेर कर दिया,वो बूढ़ा जिस्म वही ढेर हो गया,और “हे राम” के साथ एक महात्मा को एक “हैवान” ने मौत के घाट उतार दिया,लेकिन क्या गांधी उस दिन मर गए … पढ़ना जारी रखें गांधी के साथ,या गांधी के ख़िलाफ़?

”सेल्फी विद कूड़ा”, सफ़ाई या गांधी जी को भुलाने की साज़िश

2 अक्टूबर साल का इकलौता ऐसा दिन था.. जिस दिन सत्य, अहिंसा की कहानियां सुनाई जाती थीं.. बताया जाता था की कैसे बिना हिंसा के भी अपनी बातें मनवाई जा सकती हैं… आज भी याद है की अब की तरह उस दिन छुट्टियां नहीं हुआ करती थी.. उस दिन वो पाठ पढ़ाया जाता था जिसकी ज़रूरत शायद अब हर एक हिंदुस्तानी को हैं.. वो पाठ … पढ़ना जारी रखें ”सेल्फी विद कूड़ा”, सफ़ाई या गांधी जी को भुलाने की साज़िश

वे लग गए गाँधी जैसा दिखने की कोशिश में, मगर क्या कोई बन सकता है गांधी ?

बहुत दिन बीते हमारे मुल्क में गाँधी जी पैदा हुए थे। बड़ी लड़ाई लड़ी उन्होंने। अपने मुल्क में भी और दीगर देश में भी। दूसरों की चोट से खुद चोटिल होते रहे और दूसरों को अपना समझकर उनके दुख-तकलीफों के निदान में खुद को होम करते रहे। अपने को जलाते-जलाते अपने मुल्क में उजाला ला दिए। शख्शियत ऐसी कि अपने देश में ही नहीं बल्कि … पढ़ना जारी रखें वे लग गए गाँधी जैसा दिखने की कोशिश में, मगर क्या कोई बन सकता है गांधी ?