किसान पर कविता- दिल्ली का सिंहासन डोल उठेगा

किसान बेटा जब बोल उठेगा जिस दिन किसान का बेटा बोल उठेगा…. दिल्ली का सिंहासन डोल उठेगा…. मिट्टी में मिल जायेंगे तख्तो ताज तुम्हारे… जिस दिन किसान का बेटा भी, किसान एकता बोल उठेगा….!! अभी रो रहा है,वो बात बात पे… अभी सो रहा है ,वो दिल्ली घाट पे.. अभी गुमराह ही रहा है,वो बात बात पे.. पर जिस दिन वो बोल उठेगा…. दिल्ली का … पढ़ना जारी रखें किसान पर कविता- दिल्ली का सिंहासन डोल उठेगा

कविता – ये दुनिया आखिरी बार कब इतनी खूबसूरत थी?

ये दुनिया आखिरी बार कब इतनी खूबसूरत थी? जब जेठ की धधकती दुपहरी में भी धरती का अधिकतम तापमान था 34 डिग्री सेलसियस। जब पाँच जून तक दे दी थी मानसून ने केरल के तट पर दस्तक, और अक्टूबर के तीसरे हफ्ते ही पहन लिए थे हमने बुआ के हाथ से बुने हॉफ़ स्वेटर… ये दुनिया आखिरी बार…….. जब सुबह आ जाता था आंगन में … पढ़ना जारी रखें कविता – ये दुनिया आखिरी बार कब इतनी खूबसूरत थी?