भारत के मरते हुए लोकतंत्र का चेहरा

देश कभी कभी अपने विचार खो देता है। और ऐसा विशेषतया तब होता है जब घोर नकारात्मक शक्तियाँ देश की आत्मा पर कालिख पोतने लगती हैं। इतना प्रचंड कोलाहल पैदा किया जाता है कि बिलखते हुए देश की मरी हुयी आह कोई नहीं सुनता। अगर किसी तरह किसी के कानों में कभी कोई व्याकुल वेदना की कसकती आवाज धोखे से पड़ भी जाती है तो … पढ़ना जारी रखें भारत के मरते हुए लोकतंत्र का चेहरा