They cant scare us into silence!

They cant scare us into silence!  (My statement on the attempt on my life, yesterday) With the repeated death threats against my life, and having seen the assassinations of one activist after the other in the last few years, I somehow knew that someday a gun may be turned against me too. Dhabolkar, Kalburgi, Pansare, Gauri Lankesh…the list of assassinations has been ever-growing. But can … पढ़ना जारी रखें They cant scare us into silence!

क्या आपको ये हत्याएं एक जैसी नज़र नहीं आती

मता-ए-लौह-ओ कलम छिन गई तो क्या गम है कि खून ए दिल में डूबो ली हैं उंगलियां मैंने RIP Freedom of Expression फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का आलम ये है कि सोशल मीडिया पर अगर आप अपने देश के प्रधानमंत्री से ये पूछते हैं कि वो सिलेक्टिव साइलेंस क्यों अख्तियार करते हैं,तो आप से पलट के कहा जाएगा कि पीएम क्या हर बात पर ट्वीट करेंगे … पढ़ना जारी रखें क्या आपको ये हत्याएं एक जैसी नज़र नहीं आती

क्या है, गौरी लंकेश के धर्म के सम्बन्ध में फ़ैलाये जा रहे झूठ की वास्तविकता

पत्रकार गौरी लंकेश से सम्बन्धित एक सोशल मीडिया में फ़ैलाया जा रहा है, कि वो इसाई थीं और मिशनरी के निर्देश पर हिंदू धर्म की कुरीतियों पर कटाक्ष करती थीं. पर अफ़वाहवाज़ो के इस झूठ की वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार ने हवा निकाल दी है.दरअसल गौरी लंकेश एक पत्रिका निकालती थीं, जिसका नाम था “गौरी लंकेश पत्रिके”. उनकी इस पत्रिका के नाम के आखिरी शब्द … पढ़ना जारी रखें क्या है, गौरी लंकेश के धर्म के सम्बन्ध में फ़ैलाये जा रहे झूठ की वास्तविकता

इन्होंने गौरी लंकेश को मारा नहीं, बल्कि अमर कर दिया है

गौरी लंकेश मारी गयी,एक पत्रकार मारी गई, धड़ाधड़ गोलियों से उन्हें छलनी कर दिया गया,वो अपने अंत के साथ ज़मीन पर जा गिरी,ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनका “लिखना” किसी को पंसद नही था,ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनका “बोलना” किसी को पसन्द नही था,लेकिन क्या गोरी को लंकेश को मारा जा सकता है? क्या इस निडर पत्रकार को भुलाया जा सकता है? क्या इस एक्टिविस्ट को … पढ़ना जारी रखें इन्होंने गौरी लंकेश को मारा नहीं, बल्कि अमर कर दिया है

बोलते रहिये, चुप रहना तो मुर्दो की निशानी है

मैं गौरी लंकेश को कल के पहले नहीं जानता था, पर अब जान गया. अधिकांश लोग सवाल करते है की ये गुस्सा किस बात का ? क्या बदल गया है ? बोलने की आज़ादी तो सबको है ! तब मेरे एक मित्र कहते है की बोलने की आज़ादी तो है, पर बोलने के बाद आज़ादी नहीं है ! ये अपने आप में बड़ा ही विस्मयकारी … पढ़ना जारी रखें बोलते रहिये, चुप रहना तो मुर्दो की निशानी है