इलेक्शन 2018 – एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में घटा महिला प्रतिनिधित्व

भारत में महिलाओं के सम्मान और पुरुषों के समान अधिकारों की मांग का सिलसिला विगत वर्षों से चला आ रहा है महिलाएं भारत की आबादी में आधे से कई ज़्यादा स्थान रखती हैं. इस आधी आबादी के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक अधिकारों को समय-समय पर उठाया भी जाता रहा है. राजनीतिक रूप से देखने पर ज्ञात होता है कि महिलओं से जुड़ा सबसे बड़ा मुद्दा विधायिका … पढ़ना जारी रखें इलेक्शन 2018 – एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में घटा महिला प्रतिनिधित्व

निर्दलीय लड़कर जीत हासिल की, शिवराज के साले रहे चौथे नंबर पर

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान शिवराज सिंह चौहान के साले संजय सिंह मसानी चर्चा का विषय रहे. संजय सिंह मसानी ने कांग्रेस जॉइन करते ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासन के खात्मे की बात कही थी. संजय मसानी को कांग्रेस ने बालाघाट ज़िले की वारासिवनी सीट से उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा था. पर संजय चौथे स्थान पर रहे. वारासिवनी से जीत दर्ज करने … पढ़ना जारी रखें निर्दलीय लड़कर जीत हासिल की, शिवराज के साले रहे चौथे नंबर पर

साहित्य – हज़ारों किताबों के निचोड़ कि तरह है “सलाम बस्तर”

इस किताब यानी “सलाम बस्तर” को पढ़ कर जैसे मैं सत्तर के दशक में घूम आया हूँ और वो मेरे सामने से ही निकला चला गया,जहाँ तमाम विवादित गतिविधियों ने पेर पसारे थे और विरोध और समर्थन हुए थे,जी हां बात हो रही है,भारत के माओवादी आंदोलन की जहां एक बीहड़ जंगल मे बैठ कर करी गयी बात एक आंदोलन बन गयी ,वो अलग बात … पढ़ना जारी रखें साहित्य – हज़ारों किताबों के निचोड़ कि तरह है “सलाम बस्तर”

महिलाओ के लिये नर्क़ बनता छत्तीसगढ – ज़िम्मेदार कौन ?

  आज का छत्तीसगढ़ कभी धान का कटोरा कहलाता रहा है. अविभाजित मध्य प्रदेश से 1 नवम्बर 2000 में अलग होकर ये एक राज्य की शक्ल में आया, सत्रह बरस के इस युवा राज्य की जनसंख्या – 2011 की गणना के मुताबिक़ 2 करोड़ 55 लाख थी. जिसमें 1,28,32,895 पुरुष और 1,27,12,303 औरतों की जनसंख्या थी. यहाँ की साक्षरता दर 71 फ़ीसदी है. वैसे तो … पढ़ना जारी रखें महिलाओ के लिये नर्क़ बनता छत्तीसगढ – ज़िम्मेदार कौन ?

वर्षा डोंगरे केस – क्या उद्योगपतियो के सामने नत्मस्तक है सरकार

कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ फ़िर से चर्चा में था, लेकिन इस बार दुर्दांत नक्सलियों की वजह से नहीं बल्कि वजह थी राज्य सरकार की मूर्खता की वजह से, राजधानी रायपुर के सेन्ट्रल जेल की डेप्युटी जेलर सुश्री वर्षा डोंगरे जिन्होंने अपनी फ़ेसबुक वाल पे आदिवासी बच्चियों के जिस्म पे पुलिस बर्बरता की न सिर्फ दास्तान पोस्ट की बल्कि उनके मानवाधिकारों की बहाली और शांति क़ायम … पढ़ना जारी रखें वर्षा डोंगरे केस – क्या उद्योगपतियो के सामने नत्मस्तक है सरकार