नज़रिया – भारत का आधार धर्म नहीं धर्मनिरपेक्षता है

सन् 85 के बाद पैदा होने वालों के साथ एक बड़ी दिक्कत हो रही है। इनमें से अधिकतर को देश और धर्म के बीच फर्क करना नहीं आ रहा है। ये दिक्कत कश्मीर में उन लोगों के साथ भी है जो सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं, और उनके भी साथ है जो बाकी भारत में मुसलमानों को पीटते हुए भारत मां की जय बोल रहे … पढ़ना जारी रखें नज़रिया – भारत का आधार धर्म नहीं धर्मनिरपेक्षता है

आजकल का राष्ट्रवाद, सेक्युलरवाद और हिंदुत्व

देश में जहाँ एक तरफ राष्ट्रवाद का सर्टिफिकेट बांटा जा रहा है तो दूसरी तरफ़ सेक्युलरवाद का, मेरी समझ में लगता है सर्टिफिकेट बांटने वालों ने आपस में गुप्त समझौता कर लिया है की राष्ट्रवाद का मतलब पूर्ण हिंदुत्व, और सेक्युलरवाद का मतलब मिक्स्ड हिंदुत्व है। आप यदि पूर्ण हिंदुत्व के समर्थक हैं तो आप राष्ट्रवादी हैं और यदि आप मिक्स्ड हिंदुत्व के समर्थक हैं … पढ़ना जारी रखें आजकल का राष्ट्रवाद, सेक्युलरवाद और हिंदुत्व

क्या पकिस्तान के नाम पर देश को बेवकूफ़ बना रही है मोदी सरकार ?

यकीन मानिये पाकिस्तान के प्रति हालिया युद्धोन्माद का एक कारण पुलवामा हमले के साथ साथ लोकसभा चुनाव 2019 भी है। चुनाव बाद जो भी सरकार आएगी वह पाकिस्तान से बातचीत करेगी ही। यह बातचीत पाकिस्तान के प्रति अनुराग या हृदय परिवर्तन का परिणाम नहीं होगा बल्कि यह अंतराष्ट्रीय कूटनीतिक समीकरण और दोनों देशों के नाभिकीय अस्त्रों से लैस होने के कारण होगा। कूटनीति अंतर्राष्ट्रीय  परिस्थितियों, … पढ़ना जारी रखें क्या पकिस्तान के नाम पर देश को बेवकूफ़ बना रही है मोदी सरकार ?

राष्ट्र निर्माण का मापदंड क्या है ?

कभी संघ के विचारक देश के विकास के रूप में विश्वस्तरीय शिक्षा संस्थान, शोध संस्थान, चरक, सुश्रुत, धन्वंतरि, अश्विनीकुमारों के नाम पर, ( ये नाम भी भारतीय परंपरा के चिकित्सा शास्त्र से जुड़े प्रसिद्ध नाम हैं और संघ इन नामों पर अपना कॉपीराइट समझता है ) बड़े बड़े प्रतिभा सम्पन्न अस्पताल, चिकित्सा केंद्र , नालंदा तक्षशिला की ख्याति के अनुरूप बहु विषयीय शिक्षा केन्द्र बनाने … पढ़ना जारी रखें राष्ट्र निर्माण का मापदंड क्या है ?

भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश में फर्क क्या है ?

कोई कंही से पूरा नहीं चला जाता, जँहा से आये वँहा अपना कुछ छूट गया और उनका कुछ साथ आ गया, नहीं समान नहीं ! अमरीका में रहते हुए भारत की याद बेतरह सताती थी सो अमरीका में भारत खोजते थे। चाव तो आता था की घर भी विदेशियों संग बांटे लेकिन दो दिन में पता चल जाता है की घर वही मुफीद है जँहा … पढ़ना जारी रखें भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश में फर्क क्या है ?

गांधी के साथ,या गांधी के ख़िलाफ़?

एक एक कर बारी बारी चारों गोलियाँ सीने को चीरते हुए उसमे समा गई और महज़ उन बंदूक से निकले बारूद ने एक युग को,एक समाज को और एक विचारधारा को महज कुछ गोलियों से ढेर कर दिया,वो बूढ़ा जिस्म वही ढेर हो गया,और “हे राम” के साथ एक महात्मा को एक “हैवान” ने मौत के घाट उतार दिया,लेकिन क्या गांधी उस दिन मर गए … पढ़ना जारी रखें गांधी के साथ,या गांधी के ख़िलाफ़?

भारत- पाकिस्तान के रिश्तों पर जमी बर्फ को तोड़ने का समय आ गया

( यह लेख मूल रूप से अंग्रेज़ी में लिखा गया था, जिसे विख्यात पत्रकार “सुहासिनी हैदर” ने “द हिंदू” अखबार के लिए लिखा था, पेश है Time for an icebreaker: on India-Pakistan relations का हिंदी अनुवाद ) 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच दूरियों का बढ़ते जाना लाज़मी था, लेकिन पूरी तरह से ऐसा हुआ नहीं. हालाँकि उस दौर का एक … पढ़ना जारी रखें भारत- पाकिस्तान के रिश्तों पर जमी बर्फ को तोड़ने का समय आ गया

देशप्रेम या देशभक्ति का दिखावा

Patriotism is the last refuge of a scoundrel” “देशभक्ति निकृष्टो की अंतिम शरण है” ये प्रसिद्ध कथन Samuel Johnson का है जो आज भी सही प्रतीत हो रहा है| आजकल अपने आस-पास एक ट्रेंड चल रहा है देशभक्ति,देशभक्ति का सीधा सा अर्थ है जो देश व देश के संविधान का सम्मान करता हो | आजकल इसका अर्थ इतना भर नहीं रह गया है, आज वही … पढ़ना जारी रखें देशप्रेम या देशभक्ति का दिखावा

मूलभूत समस्यायों से झूझता भारत

हमारा देश भारत. जिस पर हमें अगाध गर्व है, कुछ मूलभूत सुविधाओं के लिए झूझ रहा है. जनसँख्या की दृष्टि से देखें तो विश्व में प्रत्येक छठा नागरिक भारतीय है. और विश्व में दूसरा स्थान है. लेकिन मूलभूत सुविधाओं जैसे-रोटी, कपडा, मकान और दिल्ली जैसे महानगरों में श्वास लेने के लिए स्वच्छ  हवा और स्वच्छ पानी के संसाधनों की स्थिति दुरूह हो गयी है. दूसरा … पढ़ना जारी रखें मूलभूत समस्यायों से झूझता भारत

देश में पनप रहा है भीड़ तंत्र

एक भीड़ है। उस पर किसी का नियंत्रण नहीं है। वह आजाद है। कहीं कहीं उसे सत्ता संरक्षण मिला हुआ है, तो कहीं वह कानून को धता बताते हुए मनमानी करती है। अब उस भीड़ की एक पहचान भी बन गई है। गले में भगवा पट्टा। हाथ में स्मार्ट फोन। स्मार्ट फोन इसलिए कि अपनी कारगुजारी रिकॉर्ड भी करनी है, ताकि उनके आकाओं को पता … पढ़ना जारी रखें देश में पनप रहा है भीड़ तंत्र