असम, त्रिपुरा, मणिपुर, मेघालय में क्यों हो रहा है नागरिकता संशोधन बिल का विरोध?

मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन बिल को लोक सभा में पास करा लिया है। इसके प्रावधान के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में सताए गए वैसे हिन्दू, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई को भारत में छह साल रहने के बाद नागरिकता दी जा सकती है जो 31 दिसंबर 2014 के पहले भारत आ गए थे। बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर बीजेपी की जो भी समझ रही … पढ़ना जारी रखें असम, त्रिपुरा, मणिपुर, मेघालय में क्यों हो रहा है नागरिकता संशोधन बिल का विरोध?

NRC, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स, एनआरसी ड्राफ्ट और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

31 जुलाई 2018 को एनआरसी, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स की ड्राफ्ट रिपोर्ट प्रस्तुत हो गयी है। इस ड्राफ्ट रिपोर्ट के अनुसार लगभग 40 लाख लोगों की नागरिकता संदिग्ध है। ये वे लोग हैं जिनके नागरिकता के बारे में कोई सुबूत सरकार को नहीं मिले हैं। लेकिन यह एक ड्राफ्ट रिपोर्ट है, यह किसी की नागरिकता पर कोई अंतिम निर्णय नहीं है। लेकिन सोशल मीडिया पर … पढ़ना जारी रखें NRC, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स, एनआरसी ड्राफ्ट और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

“असमिया हिंदू” बनाम “बंगाली हिंदू”

अपने ही देश के 40 लाख लोगों से नफरत करना सिखा देती है बस 1 लिस्ट। राष्ट्रवाद अब तक हमको उनसे नफरत करना सिखाता था जो हमारे इलेक्टोरल कमीशन के यहां एनरोल नही था। लेकिन अब देश मे साथ रह रहा भी आपकी नफरत का शिकार बन सकता है. लिस्ट पर शक आना इसलिए स्वाभाविक है क्योकि पूर्व राष्ट्रपति का परिवार का नाम इसमे नही, … पढ़ना जारी रखें “असमिया हिंदू” बनाम “बंगाली हिंदू”

नज़रिया – तरुण गोगोई के इस ट्वीट के बाद क्या राहुल गांधी का घेराव करेंगे NRC पीड़ित

असम में चालीस लाख नागरिकों की नागरिकता ख़तरे में है। ट्वीटर पर असम के पूर्व मुख्यमंत्री श्री तरूण गोगोई ने एलान करते हुए लिखा है कि NRC उनकी दिमाग की उपज थी। असम में NRC की कोई ज़रूरत नहीं थी फिर भी हमने बनाया। 15 साल तक ये आदमी असम का मुख्यमंत्री रहा। 2001-16 तक। जिन चालीस लाख नागरिकों की नागरिकता पर आज तलवार लटक … पढ़ना जारी रखें नज़रिया – तरुण गोगोई के इस ट्वीट के बाद क्या राहुल गांधी का घेराव करेंगे NRC पीड़ित

असम में NRC की प्रक्रिया पर उठते सवाल, ये हैं स्याह पहलू

असम में आज 40 लाख लोगों का नाम नागरिकता की लिस्ट में नही है . कुछ लोग राजनाथ सिंह के बयान के आधार पर बता रहे है की सब कुछ ठीक है पैनिक नही लेना चाहिए लेकिन असम में अफरातफरी का माहौल है पूरे असम में धारा 144 लागू है. केवल बराक वैली के तीन शहरों में ही नहीं 100 प्लाटून रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स तैनात ह, … पढ़ना जारी रखें असम में NRC की प्रक्रिया पर उठते सवाल, ये हैं स्याह पहलू

असम में NRC से सिर्फ़ बंगाली मुस्लिम नहीं, बल्कि हिन्दू भी प्रभावित हैं

बस इतना समझ लीजिये कि 40 लाख सिर्फ मुस्लिम नहीं हैं. उसमें वो सभी लोग हैं, जो बंगाली भाषी हैं. उसमें हिन्दू और मुसलमान दोनों हैं. क्योंकि असमिया लोगों को बंगाली बर्दाश्त नहीं, उनकी नज़र में हर बांगलाभाषी बांग्लादेशी है. अब सवाल ये है, कि जब ये मामला पूर्णतः असमिया और बंगाली के बीच की लड़ाई है, तो इसे सांप्रदायिक रंग किसने दिया ? सवाल … पढ़ना जारी रखें असम में NRC से सिर्फ़ बंगाली मुस्लिम नहीं, बल्कि हिन्दू भी प्रभावित हैं

क्या है ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस’ NRC

असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का उद्देश्य बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों को चिह्नित करना है. राज्य सरकार द्वारा यह कदम भारत के मूल नागरिकों की पहचान और असम में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को बाहर करने के लिए उठाया गया है. अवैध विदेशियों के खिलाफ असम आंदोलन (1979 – 85) के कारण केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अखिल भारतीय छात्र संघ AASU और अखिल … पढ़ना जारी रखें क्या है ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस’ NRC

असम की राजनीति में “बदरुद्दीन अजमल” का उदय कैसे हुआ?

वह लोग भी बदरुद्दीन अजमल क़ासमी को दलाल घोषित कर रहे है जिन्हें यह भी मालूम नहीं कि असम की राजनीति का केंद्र बिंदु क्या है। असम में बदरुद्दीन अजमल के राजनीतिक उदय को समझने के लिए थोड़ा इतिहास में जाना पड़ता है। असम के दो आतंकी संगठनों “बोडो लिबरेशन टाइगर्स फ़ोर्स (बीएलटीएफ)” और “उल्फ़ा” की गतिविधियों से केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व परिचित … पढ़ना जारी रखें असम की राजनीति में “बदरुद्दीन अजमल” का उदय कैसे हुआ?