नज़रिया – 1857 का राष्ट्रवाद, नरेंद्र मोदी और 2019

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव ABVP ने धांधली से जीता। सच्ची तस्वीर सामने आई मतगणना के छठे राउंड में। ABVP के उम्मीदवार NSUI से पीछे चल रहे थे। अचानक ईवीएम ने काम करना बंद कर दिया। कौटिंग रोक दी गयी। कुछ घंटो बाद जब कौटिंग शुरू हुई तो ABVP ने 4 में से 3 सीटें जीत ली! 2017 और 2018 में लगभग सभी छात्रसंघ चुनावों ABVP … पढ़ना जारी रखें नज़रिया – 1857 का राष्ट्रवाद, नरेंद्र मोदी और 2019

मंगल पांडे को लेकर “1857 राष्ट्रवादी मंच” की इस मांग को, क्या पूरा कर पायेगी योगी सरकार?

1857 जंग-ए-आज़ादी की 161वी जयन्ती के उपलक्ष मे, 1857 राष्ट्रवादी फोरम ने लखनऊ के शेरोज़ कैफे मे एक प्रेस कॉन्फरेंस का आयोजन किया। प्रेस को सम्बोधित करते हुए, मंच के संयोजक श्री अमरेश मिश्र ने 1857 की 161वी वर्षगांठ को मनाने हेतु, पहले डेढ़ माह का कार्यक्रम रखा। इसके तीन प्रमुख बिन्दु हैं: मंच द्वारा अमर शहीद मंगल पाण्डे की विशाल प्रतिमा का निर्माण। 5 … पढ़ना जारी रखें मंगल पांडे को लेकर “1857 राष्ट्रवादी मंच” की इस मांग को, क्या पूरा कर पायेगी योगी सरकार?

चुनाव के आईने में गुजरात का गौरवशाली अतीत

लोकतंत्र के भविष्य के लिए गुजरात चुनाव अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। पर गुजरात के राजनीतिक व्यवहार को समझने के लिए उसकी सामाजिक-वर्ग संरचनाओं को एक ऐतिहासिक संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण है। उथल-पुथल के दौर ही में सामाजिक-वर्ग संरचनाओं उभर कर सामने आती हैं। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (BEIC) के खिलाफ 1857-58 के दौरान गुजरात में भारी विद्रोह हुआ था। इस विद्रोह के क्षेत्रों में, ब्रिटिश शासन के … पढ़ना जारी रखें चुनाव के आईने में गुजरात का गौरवशाली अतीत

Gujarat in 1857 – When Hindus and Muslims fought together

Context: Current Gujarat elections. (Extracts from ‘War of Civilisations: India 1857 AD’, by Amaresh Misra, Rupa, 2008) The importance of Gujarat elections to the future of Indian democracy and the survival of India’s liberal-democratic-nationalist ethos cannot but be re-emphasized. However, in order to understand Gujarat’s political behaviour, it is important to view its social-class structures in a historical context. Social-class structures are revealed best, during … पढ़ना जारी रखें Gujarat in 1857 – When Hindus and Muslims fought together

Bahadur Shah Zafar’s Appeal to Jat Peasants

7th November 2017 marks the 155th death anniversary of Bahadur Shah Zafar, the last Mughal, and the first leader of India’s first war of independence. 24th October, 2017 marked Zafar’s 242nd birth anniversary. On that ocassion, I had written a post on how Zafar and 1857 nationalism are the only true antidote to the politics of the Sangh Parivar. You can see the post here. People … पढ़ना जारी रखें Bahadur Shah Zafar’s Appeal to Jat Peasants

Taj is a Symbol of 1857 Indian Nationalism

Taj is a Symbol of 1857 Indian Nationalism. It has Two Eniemeis : Sanghi Fascist and the British. It is well known that the British had a hand in promoting RSS and that RSS reciprocated by staying aloof from the Freedom movement. helping the British as informers. RSS and the British also shared dislike for the Mughals. Taj as as Anti-Colonial, Anti-Fascist Symbol For the … पढ़ना जारी रखें Taj is a Symbol of 1857 Indian Nationalism

आखिरी मुग़ल और 1857 का स्वतंत्रता संग्राम

आज 24 अक्टूबर 2017 को आखिरी मुग़ल बादशाह, और 1857 भारत की पहली जंग-ए-आज़ादी के नेता, बहादुरशाह ज़फर, की 242वी जयंती है। सिर्फ दो हफ्ते बाद, 7 नवंबर 2017 को,ज़फर की 155 वीं पुण्यतिथि भी आ जाएगी. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी म्यांमार यात्रा के दौरान रंगून में मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फर की कब्र पर श्रृद्धांजलि अर्पित की थी। बहादुर शाह … पढ़ना जारी रखें आखिरी मुग़ल और 1857 का स्वतंत्रता संग्राम

The last Mughal and first Indian Freedom Struggle 1857

24th October 2017 will mark the 242nd birth anniversary of Bahadur Shah Zafar, the last Mughal, described by none other than Veer Savarkar as the leader of 1857, India’s first Independence war. Just two weeks later, on 7th November, 2017, Zafar’s 155th death anniversary will arrive; on his recent visit to Myanmar, PM Modi paid homage to Zafar’s grave in Rangoon. BRING BACK ZAFAR’S REMAINS … पढ़ना जारी रखें The last Mughal and first Indian Freedom Struggle 1857