कविता- बेटी से माँ तक का सफर

बेफिक्री से फ़िक्र का सफर रोने से खामोश कराने का सफर बेसब्री से तहम्मुल का सफर पहले जो आँचल में छुप जाया करती थी आज किसी को आँचल में छुपा लेती है पहले जो ऊँगली जल जाने से घर सर पर उठा लेती थी आज हाथ जल जाने पर भी खाना बनाया करती है पहले जो छोटी छोटी बातों पर रो जाया करती थी आज … पढ़ना जारी रखें कविता- बेटी से माँ तक का सफर

कविता – ये दुनिया आखिरी बार कब इतनी खूबसूरत थी?

ये दुनिया आखिरी बार कब इतनी खूबसूरत थी? जब जेठ की धधकती दुपहरी में भी धरती का अधिकतम तापमान था 34 डिग्री सेलसियस। जब पाँच जून तक दे दी थी मानसून ने केरल के तट पर दस्तक, और अक्टूबर के तीसरे हफ्ते ही पहन लिए थे हमने बुआ के हाथ से बुने हॉफ़ स्वेटर… ये दुनिया आखिरी बार…….. जब सुबह आ जाता था आंगन में … पढ़ना जारी रखें कविता – ये दुनिया आखिरी बार कब इतनी खूबसूरत थी?