संविधान की झूठी व्याख्याओं के दंभ की हार हुई है

येदियुरप्पा ने किसानों की जितनी बात की है उतनी तो चार साल में देश के कृषि मंत्री ने नहीं की होगी। उन्हें ही कृषि मंत्री बना देना चाहिए और न्यूज एंकरों को बीजेपी का महासचिव। एक एंकर बोल रहा था कि येदियुरप्पा इस्तीफा देंगे। नेरेंद्र मोदी कभी इस तरह की राजनीति को मंज़ूरी नहीं देते। सुनकर लगा कि अमित शाह राहुल गांधी से पूछकर ये … पढ़ना जारी रखें संविधान की झूठी व्याख्याओं के दंभ की हार हुई है

“भारतीय संविधान”, जो भारत को बनता है एक “लोकतांत्रिक गणतंत्र”

वो संविधान जिसने सबको बराबर बनाया, वो संविधान जिसने सबको सीन चौड़ा करके जीना सिखाया,वो संविधान जिसने सर उठाकर हर शख्स को बोलने,लिखने,पढ़ने,और अपने लिए आवाज़ उठाने का अधिकार दिया,वही संविधान जिसने फूहड़,दकियानूसी,धर्मान्ध,नीच और गिरी सोच को चकनाचूर कर दिया वही संविधान जिसने हर इंसान को जाति,धर्म,पैसा और इलाके से ऊपर उठकर सबको बराबर बना दिया. वही संविधान जिसके लिए सब बराबर वही संविधान जो … पढ़ना जारी रखें “भारतीय संविधान”, जो भारत को बनता है एक “लोकतांत्रिक गणतंत्र”

देश के लिए धर्मनिरपेक्षता और संविधान का महत्व

एक वक्त वह भी था जहां हम भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र और विभिन्न संप्रदायों के समूहों का देश, के रूप में देख सकते थे और इस बाबत संविधान या किसी और दस्तावेज़ में किसी प्रकार की कोई घोषणा करने की कहीं जरूरत नहीं थी. ना ही किसी प्रकार के आधिकारिक ऐलान की जरूरत थी. हम भारत को हमेशा एक धर्मनिरपेक्ष और सभी आस्था और … पढ़ना जारी रखें देश के लिए धर्मनिरपेक्षता और संविधान का महत्व

खतरे में हैं अंबेडकर का संविधान – कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी

कांग्रेस के 133वें स्थापना दिवस पर आज पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी हेडक्वाटर पहुंचे. यहां उन्होंने सलामी देते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की है. ये स्थापना दिवस पार्टी के लिए इसलिए खास है क्योंकि अध्यक्ष बनने के बाद राहुल ने पहली बार झंडा फहराया है. उन्होंने कहा कि हम भले ही हार जाएं, लेकिन सच का साथ नहीं छोड़ेंगे. Congress President Rahul Gandhi at party … पढ़ना जारी रखें खतरे में हैं अंबेडकर का संविधान – कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी

संविधान की प्रस्तावना और वर्तमान भारतीय समाज

“हम भारत के लोग भारत को एक संप्रभु , समाजवादी,धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणतंत्र में विधिवत तौर पर गठित करने का संकल्प करते है और इसके सभी नागरिकों के लिए न्याय समाजिक,आर्थिक और राजनीतिक, स्वतन्त्रता-विचार अभिव्यक्ति, विश्वास, निष्ठा तथा पूजा की समानता स्तर तथा अवसर को सुनिश्चित करना और सभी नागरिकों के बीच प्रोत्साहित करना भ्रातत्व तथा व्यक्तिगत गरिमा को सुनिश्चित करना और राष्ट्र की एकता तथा … पढ़ना जारी रखें संविधान की प्रस्तावना और वर्तमान भारतीय समाज