“फ़िराक गोरखपुरी” के बारे में क्या ये जानते हैं आप ?

फ़िराक़ साहब ( 28 अगस्त 1896 से 3 मार्च 1982 ) एक जीनियस थे। रहने वाले गोरखपुर के, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अंग्रेज़ी के टॉपर, और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में ही अंग्रेज़ी के अध्यापक, और उर्दू के एक अज़ीम शायर। ज़िंदगी का सफर भी उनका, कुछ गमें जानां तो कुछ दौरां। कभी प्रेयसी का गम, तो कभी ज़माने का गम। निजात इस गम से ? ‘ मौत … पढ़ना जारी रखें “फ़िराक गोरखपुरी” के बारे में क्या ये जानते हैं आप ?

नानक सिंह- कलम की वजह से जेल भी गए और साहित्य सम्मान भी पाया

पंजाबी भाषा के मशहूर उपन्यासकार नानक सिंह का जन्म 4 जुलाई 1897 में हुआ था, तथा 18 दिसंबर 1971 को उनकी मृत्यु हुई. वह एक लेखक और स्वंत्रता संग्राम सेनानी थे. अंग्रेज़ सरकार के विरुद्ध लिखने की वजह से उन्हें जेल भी जाना पड़ा. अपनी साहित्यिक रचनाओं के लिए उन्होंने कई सम्मान प्राप्त किये थे. वह झेलम जिले (अब पाकिस्तान में) में एक गरीब पंजाबी … पढ़ना जारी रखें नानक सिंह- कलम की वजह से जेल भी गए और साहित्य सम्मान भी पाया

आखिर ‘मंटों’ ने कम्युनिष्टों को क्यों कहा – मैं उन्हें ठग मानता हूं.

इसे  विडंबना ही कहा जाएगा कि कुछ महान शख्सियतें कागज के पन्नों पर इन्सानी जिंदगी, समाज और इतिहास की विडंबनाओं की परतों को उघाड़ने में जितनी माहिर होती हैं उनकी खुद की जिंदगी उन्हें इतना मौका नहीं देती कि वे बहुत ज्यादा वक्त तक लिखते रहें. शख्सियतों की इसी फेहरिस्त में एक नाम है- सआदत हसन मंटो.भारतीय उपमहाद्वीप के इस लेखक और उसके सृजन पर … पढ़ना जारी रखें आखिर ‘मंटों’ ने कम्युनिष्टों को क्यों कहा – मैं उन्हें ठग मानता हूं.