संस्थाओं की बर्बादी के बीच जनता की मदहोशी

सूट-बूट की सरकार से शुरूआत करने वाली मोदी सरकार पांच साल बीतते-बीतते बड़े लोगों की सरकार हो गई है। बड़े लोगों की चिन्ता में जेटली जी दुबले हुए जा रहे हैं। महीनों जजों की कुर्सी ख़ाली रही मगर सरकार अपने अहं की लड़ाई लड़ती रही। आम लोग इंसाफ़ के लिए भटकते रहे। प्रतिष्ठा धूल मिट्टी में मिलती रही। तब भारत के ब्लॉग मंत्री सह वित्त … पढ़ना जारी रखें संस्थाओं की बर्बादी के बीच जनता की मदहोशी

कोई पैसा लेकर भाग जा रहा है, कोई पैसा लेकर बैठ जा रहा है

सरकार कितना काम कर रही है उसका एक नमूना देखिए। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की ख़बर है कि लघु सिंचाई योजना के लिए 5000 करोड़ का फंड 14 महीने से मंत्रालय में ही पड़ा हुआ है। वित्त मंत्रालय ने 23 फरवरी 2018 को ही मंज़ूरी दे दी थी मगर कृषि मंत्रालय इस पैसे को पास कराने के लिए कैबिनेट के पास प्रस्ताव ही लेकर नहीं गया। इन … पढ़ना जारी रखें कोई पैसा लेकर भाग जा रहा है, कोई पैसा लेकर बैठ जा रहा है

यूनिवर्सिटी बचेगी तो सामाजिक और भाषाई विविधता से ही

भारत में जनजाति न तो पूरी तरह से परिभाषित है न ही इसे आंशिक रूप से समझा गया है। ब्रिटिश प्रशासन को उन समुदायों पर नियंत्रण करने या उनसे रिश्ता बनाने में मुश्किल हो रही थी जिन्होंने अपने प्रशासन के लिए वैसी राज्य व्यवस्था का कोई विकसित रूप नहीं बनाया था। अंग्रेज़ों ने इन समुदायों की पहचान कर, उनके इलाके को ब्रिटिश संप्रभु क्षेत्र घोषित … पढ़ना जारी रखें यूनिवर्सिटी बचेगी तो सामाजिक और भाषाई विविधता से ही