सपा में शामिल हुए योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री के दामांद

उत्तरप्रदेश में हुए उपचुनावों के साईडइफेक्ट्स सामने आने लगे हैं, ताज़ा घटनाक्रम में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के दामाद डा. नवल किशोर ने समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं. यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नवल किशोर के सपा में शामिल होने की बात कही. इस दौरान उपचुनाव में मिली जीत पर अखिलेश यादव ने कहा … पढ़ना जारी रखें सपा में शामिल हुए योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री के दामांद

दलित एवं पिछड़ों की आवाज़ थे कांशीराम

अलग अलग समय पर दुनिया भर में सामाजिक अत्याचारों और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष होते रहे हैं.इन संघर्षों से कई बड़े नेता उभर कर सामने आते रहे हैं.जैसे दक्षिण अफ्रीका में नस्लीय भेदभाव के विरुद्ध नेल्सन मंडेला, अमरीका में अब्राहम लिंकन एवं मार्टिन लूथर किंग. भारत में भी जात-पात, छुआछूत तथा नस्लीय भेदभाव के विरुद्ध बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर ने बड़े पैमाने पर संघर्ष … पढ़ना जारी रखें दलित एवं पिछड़ों की आवाज़ थे कांशीराम

दो चुनाव हारने के बाद तीसरे चुनाव में इतिहास रच दिया था “बहनजी” ने

जिसने अपनी कौम को सर उठाकर चलना सिखाया, जिसने अपनी कौम को रुतबा दिलाया,जिसने अपनी कौम की रहनुमाई की और पुरी ईमानदारी से की,यह “मायावती” है वही मायावती जिसने “चमार” शब्द सुनकर अपने अंदर ज़ब्त कर लिया था,और उस समुदाय को इज़्ज़त दिलाने का वादा किया था।जी हां यहाँ ज़िक्र है भारतीय राजनीति की “बहन जी” का। वही मायावती जिसने अपनी कौम की ख़िदमत के … पढ़ना जारी रखें दो चुनाव हारने के बाद तीसरे चुनाव में इतिहास रच दिया था “बहनजी” ने

क्यों हुआ है मऊ का नाम रौशन ?

“मऊ” यूपी का एक चर्चित ज़िला, कभी अपनी राजनीति को लेकर तो कभी किसी अन्य मुद्दे पर. इस बार मऊ का नाम कुछ अलग वजह से चर्चा में है. वजह का ताल्लुक खेल की दुनिया से है. ये अलग बात है, कि इस बार भी मऊ की चर्चा में अंसारी फ़ैमिली के एक चहरे का ज़िक्र ख़ास है. मऊ सदर सीट से विधायक मुख्तार अंसारी … पढ़ना जारी रखें क्यों हुआ है मऊ का नाम रौशन ?

क्या मुस्लिम सियासी मुहब्बत और सियासी नफ़रत से बाहर आयेंगे ?

मौलाना आज़ाद ने क्या किया, क्या नहीं किया और वह क्या और कर सकते थे, इस पर खूब बहस हो सकती है. नेहरू को भी हम सुक़ूत-हैदराबाद जो होम मिनिस्टर पटेल के दौर में हुआ और उस क़त्ल आम, उसके लिए उन पर ऊँगली उठाते हैं. लेकिन ये भी सच है कि मौलाना आज़ाद की शख्सियत की वजह से बोहत कुछ बच गया और 47 … पढ़ना जारी रखें क्या मुस्लिम सियासी मुहब्बत और सियासी नफ़रत से बाहर आयेंगे ?