भारत के बंटवारे की एक कहानी – “सतरंजे का बंटवारा”

सतरंजे का एक सिरा सुल्तान खा़न के हाथ में दूसरा सिरा सरदार खा़न के हाथ में था। सुल्तान कह रहा था- “सारा सामान बेच दिये ,एक सतरंजा बचा है , उस पे भी तुम्हारी नज़र गड़ी हुई है“, सतरंजा न हुआ सल्तनत हो गई। सरदार ख़ान चीखा “मैं बड़ा हूँ , जो चाहुँगा करुंगा ।” हाँ हाँ मुझे मालूम है,तुमने पाकिस्तान जाने का फैसला कर … पढ़ना जारी रखें भारत के बंटवारे की एक कहानी – “सतरंजे का बंटवारा”