लोकसभा चुनाव 2019 – पुलवामा हमले के शहीदों के नाम पर वोट मांगना निंदनीय है

प्रधानमंत्री जी, क्या पुलवामा हमला आप की एक उपलब्धि है या बड़ी सुरक्षा चूक ? अगर चूक है तो फिर किसी सुरक्षा चूक के नाम पर जिसमें 44 जवान शहीद हो गए हैं आप क्यों वोट मांग रहे हैं ? और अगर इसे आप अपनी उपलब्धि समझते हैं तो और बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जनसभा रैली को संबोधित करने मंगलवार … पढ़ना जारी रखें लोकसभा चुनाव 2019 – पुलवामा हमले के शहीदों के नाम पर वोट मांगना निंदनीय है

नज़रिया – क्या यह बीमार होते हुये समाज का लक्षण नहीं है

उनका इरादा साफ है। जब तक पाकिस्तान रहेगा तब तक वे देश मे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार आदि जनहित के मुद्दों पर कुछ नहीं करेंगे। न तो वे कोई बात करेंगे और न उनके समर्थक इन मुद्दों पर कोई सवाल उठाएंगे। विरोधी उठाते रहें सवाल और पूछते रहें जो भी मन हो, उससे उन्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ता है। ऐसी मानसिकता उनकी बन गयी है। … पढ़ना जारी रखें नज़रिया – क्या यह बीमार होते हुये समाज का लक्षण नहीं है

आखिर 2019 में मोहन भागवत चुप क्यों हैं?

आरएसएस ने अपने काडर को तो चुनाव में लगाया हुआ है लेकिन खुद मोहन भागवत और उनके नंबर टू भैयाजी जोशी चुनाव की घोषणा के बाद से ठंडी सांस खींचे हुये हैं. भागवत का आखिरी बयान बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक के बाद फरवरी के तीसरे सप्ताह में आया था और तब से शांत हैं. 2014 के चुनाव की याद करें तो मतदान के कई सप्ताह पहले … पढ़ना जारी रखें आखिर 2019 में मोहन भागवत चुप क्यों हैं?

चुनावी मुद्दा बनती सेना और बिना लाइसेंस के चलता नमो टीवी चैनल

लोकसभा चुनाव 2019 देश का पहला चुनाव है जिसने दो बातें अनोखी हुयी हैं। हो तो और भी रही हैं पर जिन दो बातों का में उल्लेख कर रहा हूँ वह आज तक किसी चुनाव में नहीं हुई। एक तो नमो नाम से टीवी चैनल का प्रसारण और दूसरा सेना को चुनावी मुद्दा बनाना। क्या नमो टीवी पर चुनाव आयोग की चुप्पी, भाजपा के साथ … पढ़ना जारी रखें चुनावी मुद्दा बनती सेना और बिना लाइसेंस के चलता नमो टीवी चैनल

2014 में किये वादों का क्या हुआ ?

मैं आप के साथ लोकसभा चुनाव 2014 का भाजपा का संकल्प पत्र 2014 साझा कर रहा हूँ। सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ वह चुनाव अनोखा था और उसके वादे तो और भी अलबेले थे। यह उन वादों की फेहरिस्त है। आप स्वतः तय कीजिये कि किन किन वादों का क्या हुआ और अब उन पर क्या हो रहा है। एक एक वादे … पढ़ना जारी रखें 2014 में किये वादों का क्या हुआ ?

समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में, अपील दायर क्यों नहीं कर रही है सरकार ?

अदालतों द्वारा मुल्जिमों को बरी कर देना कोई अनोखी खबर नहीं है। आपराधिक मामलों में साज़याबी का प्रतिशत बहुत उत्साहजनक नहीं है। पर अनोखी बात यह है कि, समझौता एक्सप्रेस विस्फोट के मामले में असीमानन्द के मामले में एनआईए ने ऊपरी अदालत में अपील करने से मना कर दिया है । क्यों ? जबकि फैसला पढ़ने से साफ साफ यह दिख रहा है कि  सरकारी … पढ़ना जारी रखें समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में, अपील दायर क्यों नहीं कर रही है सरकार ?

नज़रिया – 23 मई के बाद नई भूमिका में होगें मोदी और राहुल

मोदी कैबिनेट के चेहरे रविशंकर प्रसाद को पटना एयरपोर्ट पर काले झंडे दिखा दिये जाते है। झंडे दिखाने वाले बीजेपी के ही राज्यसभा सदस्य आर को सिन्हा के समर्थक थे। मोदी कैबिनेट के सबसे बडबोले मंत्री गिरिराज सिंह का टिकट नवादा से कट जाता है और गिरिराज इसके लिये बिहार प्रदेश के अध्यक्ष नित्यानंद राय को कटघरे में खडा करते हैं। शत्रुध्न सिन्हा खुल्लमखुला मोदी … पढ़ना जारी रखें नज़रिया – 23 मई के बाद नई भूमिका में होगें मोदी और राहुल

आजकल का राष्ट्रवाद, सेक्युलरवाद और हिंदुत्व

देश में जहाँ एक तरफ राष्ट्रवाद का सर्टिफिकेट बांटा जा रहा है तो दूसरी तरफ़ सेक्युलरवाद का, मेरी समझ में लगता है सर्टिफिकेट बांटने वालों ने आपस में गुप्त समझौता कर लिया है की राष्ट्रवाद का मतलब पूर्ण हिंदुत्व, और सेक्युलरवाद का मतलब मिक्स्ड हिंदुत्व है। आप यदि पूर्ण हिंदुत्व के समर्थक हैं तो आप राष्ट्रवादी हैं और यदि आप मिक्स्ड हिंदुत्व के समर्थक हैं … पढ़ना जारी रखें आजकल का राष्ट्रवाद, सेक्युलरवाद और हिंदुत्व

नज़रिया – इंतज़ार कीजिये, भीड़ आपके दरवाज़े पर कब दस्तक देती है

इतिहास साक्षी है के प्रथम विश्व युद्ध के बाद यूरोप में अराजकता का चरम था. युद्ध के बाद अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो चुकी थी. युवा वर्ग बेरोज़गारी के कारण बदहवास था और वर्तमान सत्ता से निराश आम जनों का विश्वास लोकतंत्र पर कमज़ोर हो रहा था. विरोध के स्वर उठ रहे थे. प्रदर्शन हड़तालों की सिलसिला जारी था. जनता ये बात समझ चुकी थी के प्रथम … पढ़ना जारी रखें नज़रिया – इंतज़ार कीजिये, भीड़ आपके दरवाज़े पर कब दस्तक देती है

ये मोदी और शाह की भाजपा है, इसको ‘दाग अच्छे लगते हैं’

जब सरकारी विभाग सत्ता की बांदी बन जाते हैं तो सुबूत भी सुबूत नही कहलाते . खुद आयकर विभाग ही अपने द्वारा जब्त की गयी चीजो पर संदेह करने लगता है क्योकि बिग बॉस ऐसा चाहते हैं. आखिर येदियुरप्पा को क्यो न बचाया जाए वह दक्षिण में बीजेपी का एकमात्र जाना पहचाना चेहरा है. येदियुरप्पा भारतीय जनता पार्टी का वो क्षेत्रीय चेहरा थे जिसकी वजह … पढ़ना जारी रखें ये मोदी और शाह की भाजपा है, इसको ‘दाग अच्छे लगते हैं’

क्या पकिस्तान के नाम पर देश को बेवकूफ़ बना रही है मोदी सरकार ?

यकीन मानिये पाकिस्तान के प्रति हालिया युद्धोन्माद का एक कारण पुलवामा हमले के साथ साथ लोकसभा चुनाव 2019 भी है। चुनाव बाद जो भी सरकार आएगी वह पाकिस्तान से बातचीत करेगी ही। यह बातचीत पाकिस्तान के प्रति अनुराग या हृदय परिवर्तन का परिणाम नहीं होगा बल्कि यह अंतराष्ट्रीय कूटनीतिक समीकरण और दोनों देशों के नाभिकीय अस्त्रों से लैस होने के कारण होगा। कूटनीति अंतर्राष्ट्रीय  परिस्थितियों, … पढ़ना जारी रखें क्या पकिस्तान के नाम पर देश को बेवकूफ़ बना रही है मोदी सरकार ?

जेट एयरवेज को सरकारी बैंक क्यों उबारें ?

जेट एयरवेज और एतिहाद एयर लाइंस को बचाने के लिये सरकार ने बैंकों से धन देकर मदद करने के लिये कहा है। और उधर सरकारी कम्पनी बीएसएनएल अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को तनख्वाह तक नहीं दे पा रही है। सरकार जितनी तत्परता से निजी और चहेते पूंजीपतियों के लिये सक्रिय होती है उतनी तत्परता से अपनी सरकारी कंपनियों के लिये नहीं खड़ी होती है। जेट … पढ़ना जारी रखें जेट एयरवेज को सरकारी बैंक क्यों उबारें ?

बिहार की राजनीति में कायस्थ और मुस्लिम लीडरशिप की भूमिका, इतिहास और वर्तमान

बिहार दिवस मना रहे हैं, बिहार के बंगाल से अलग हो कर 1912 में ख़ुद-मुख़्तार राज्य बनने की ख़ुशी में. बहुत मेहनत की थी अलग राज्य बनाने में हमारे बुज़ुर्गों ने. सियासत और कूटनीत का बेहतरीन नमुना पेश करते हुए हुकमत के नज़दीक रहने वाले बंगाली भाईंयों के नाक के नीचे से बिहार को अलग करवाया था. सबसे पहले अगल बिहार राज्य की आवाज़ उठाई … पढ़ना जारी रखें बिहार की राजनीति में कायस्थ और मुस्लिम लीडरशिप की भूमिका, इतिहास और वर्तमान

अंतिम साँसें ले रहा “मुस्लिम प्रतिनिधित्व”

पूर्व आईएएस टॉपर शाह फैसल ने अपने पद से त्यागपत्र देने के बाद एक नयी पार्टी का गठन किया है। शाह फैसल के इस फैसले का स्वागत होना चाहिये। उन्होने एक ऐसे समय मे यह फैसला लिया है जब काश्मीर गर्म तवे की तरह तप रहा है। यह बेहद हिम्मत की बात है जब काश्मीर मे पहले से उमर अब्दुल्लाह की नेशनल कॉन्फ्रेंस और महबूबा … पढ़ना जारी रखें अंतिम साँसें ले रहा “मुस्लिम प्रतिनिधित्व”

बेगुसराय के लिए कितना फिट हैं कन्हैया कुमार ?

हम सब यह जानते हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव 2019 का बिगुल फूंका जा चुका है, जिसके लिए हर दल ने अलग-अलग सीटों पर अपनी दावेदारी पेश करना शुरू कर दिया है. इसी क्रम में बेगूसराय से लोकसभा प्रत्याशी के लिए सीपीआई ने अपनी दावेदारी कन्हैया कुमार के नाम से पेश किया है. डॉ. कन्हैया कुमार जेएनयू छात्रसंघ के भूतपूर्व अध्यक्ष और देश के सबसे … पढ़ना जारी रखें बेगुसराय के लिए कितना फिट हैं कन्हैया कुमार ?

आपकी नज़र में आतंकवाद की परिभाषा क्या है ?

कल दोस्तों से बात हो रही थी और किसी ने कहा कि आज तक यूएन ने आतंकवाद की कोई एक और सुनिश्चित परिभाषा नहीं दी है। लेकिन 9/11 के बाद तो जैसे दुनिया भर की मीडिया ने अपनी परिभाषा तय कर ली है – हिंसा का सहारा लेने वाले मुसलमान आतंकवादी हैं जबकि दूसरे धर्म के ऐसे लोग संदेहास्पद, सरफिरे, रामभक्त, गोरक्षक, हमलावर वग़ैरह वग़ैरह … पढ़ना जारी रखें आपकी नज़र में आतंकवाद की परिभाषा क्या है ?

कौन लेगा सुरक्षा चूक ( Security failure ) की ज़िम्मेदारी ?

पठानकोट, उरी और अब पुलवामा। ये तीन हमले 2014 के बाद एनडीए सरकार में  सीधे सीधे सुरक्षा बलों पर हुए। दो तरह के हमले होते हैं। एक तो वे हमले जिनमे लक्ष्य सुरक्षा बल नहीं बल्कि नागरिक या कोई वीआईपी या कोई प्रतिष्ठान होता है। उन्हें बचाने के लिये सुरक्षा बल सामने आते हैं, जो उनका दायित्व है और वे वह हमला अपने ऊपर लेकर … पढ़ना जारी रखें कौन लेगा सुरक्षा चूक ( Security failure ) की ज़िम्मेदारी ?

नज़रिया – मुस्लिम प्रतिनिधित्व को कुचलने के लिए बेक़रार कन्हैया कुमार

मौसम के रूख के साथ राजनीति का रूख भी बदलना शुरू हुआ है। जैसे-जैसे सर्दी से बसंत की तरफ बढ़ रहे है तापमान भी बढ़ता जा रहा है। सर्दी तो छंट चुकी है और गर्मी के मौसम मे क़दम रख चुके है। मौसम के साथ-साथ चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद राजनीति का तापमान भी बढ़ना शुरू हुआ है। टिकट एवं सीट बँटवारे को … पढ़ना जारी रखें नज़रिया – मुस्लिम प्रतिनिधित्व को कुचलने के लिए बेक़रार कन्हैया कुमार

जी का जंजाल बनता जी का सम्बोधन

अपराधियों का सम्बोधन आदर सूचक शब्द से करना निंदनीय है। राहुल गांधी द्वारा, अज़हर को जी संबोधन से उल्लेख करने के बाद सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की ट्रॉलिंग हो रही है। यह संबोधन आपत्तिजनक है, इसमे कोई संदेह नहीं है। पर तब तक खोजी और तफतीशी मित्रो ने तीन उदाहरण भाजपा के नेताओं के भी ढूंढ निकाले जहां आतंकी सरगनाओं को श्री कह कर … पढ़ना जारी रखें जी का जंजाल बनता जी का सम्बोधन

Opinion – नफ़रवादियों को Surf Excel का विज्ञापन क्यों पसंद आएगा ?

सर्फ़ एक्सेल के हालिया विज्ञापन से संघियों को समस्या होना एकदम वाजिब है।ग़ौर से देखिये उस विज्ञापन का परोक्ष संदेश कि अगर बचपन से बच्चों का मिलना जुलना दोस्ती सम्भव हो तो नफ़रत की जड़ों में मट्ठा पड़ जाएगा। आप सबने सब टीवी पर आने वाला सीरियल “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” देखा होगा। राष्ट्र की विविधता के उस प्रसार में मराठी, पंजाबी, मलयाली, गुजराती … पढ़ना जारी रखें Opinion – नफ़रवादियों को Surf Excel का विज्ञापन क्यों पसंद आएगा ?