सरकार किसी की भी बने, असल मुद्दे चुनौती बनेंगे

19 मई को लोकसभा चुनाव 2019 का अंतिम चरण पूरा हो गया और परंपरा के अनुसार, सभी न्यूज़ चैनलों ने अपने अपने अनुमान के अनुसार एक्जिट पोल के नतीजे जारी कर दिये। एक्जिट पोल अनुमान होते हैं और उनका प्रमाणों से कोई सम्बंध नहीं होता है। लेकिन इस बार के चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यह चुनाव, सरकार जिस लिये चुनी जाती … पढ़ना जारी रखें सरकार किसी की भी बने, असल मुद्दे चुनौती बनेंगे

केदारनाथ तीर्थ और वहां की गुफा

रुद्र ध्यान गुफा के नाम से गढ़वाल मंडल विकास निगम ने केदारनाथ धाम से एक किलोमीटर दूर कुछ प्राकृतिक गुफाओं में से छांट कर केदारनाथ आने वाले तीर्थयात्रियों के एकांत प्रवास और ध्यान करने के लिये एक गुफा संकुल बनाया है। ऐसी गुफाएं बनाने का विचार प्रधानमंत्री ने दिया था, ऐसा उत्तराखंड सरकार का कहना है। यह गुफाएं कोई भी तीर्थयात्री किराए पर ले सकता … पढ़ना जारी रखें केदारनाथ तीर्थ और वहां की गुफा

प्रधानमंत्री की मूक प्रेस कांफ्रेंस

कल 17 मई 2019 की प्रेस कॉन्फ्रेंस जो भाजपा मुख्यालय में आयोजित की गयी थी वह किसी भी दृष्टिकोण से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं थी। वह पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस थी। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की प्रेस कांफ्रेंस थी। अमित शाह एक बॉस की तरह उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में नज़र आये। प्रधानमंत्री उनके अधीनस्थ दिखे भी और नरेंद मोदी ने यह स्वीकार … पढ़ना जारी रखें प्रधानमंत्री की मूक प्रेस कांफ्रेंस

वादा फरामोशी के पांच साल

भारतीय जनता पार्टी के एक आम समर्थक से लेकर पार्टी अध्यक्ष तक को यह बात पता है कि बंगाल में अराजकता है। रोज कोई न कोई खबर छापी जाती है कि वहां दुर्गापूजा रुक गयी। हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है। मालदा के दंगों से लेकर अवैध रूप से बांग्लादेशी लोगों और रोहिंगयों तक के बंगाल में पसर जाने आदि आदि की खबरें खूब प्रसारित … पढ़ना जारी रखें वादा फरामोशी के पांच साल

नज़रिया – क्या है, राहुल गांधी का भारत ?

हिना जुनी पंडित 16 मई 2014 बुरी तरह हार कर, गोरखपुर की दूसरी सीट बांस गांव से एक असफल चुनाव लड़वाकर अन्ततः में दिल्ली वापस आ गयी। वह वर्ष कई बुरी यादों को सहेजे है। जिनमें सबसे बुरी थी मेरी वजूद के बीस वर्षों में हो रहे ‘‘ध्रुवीकरण’’ को देखना और झेलना। इस ‘‘ध्रुवीकरण’’ का असर न सिर्फ चुनावी नतीजों पर पड़ा वरन् हमारे समाज … पढ़ना जारी रखें नज़रिया – क्या है, राहुल गांधी का भारत ?

कौन थे उमर खैयाम, जिन्हें गूगल ने दी श्रद्धांजलि ?

आज गूगल ने मशहूर फारसी कवि, गणितज्ञ, दार्शनिक, कवि और खगोलशास्त्री उमर ख़ैय्याम को उनके जन्मदिन पर डूडल बनाया। 18 मई 1048 को उत्तर पूर्वी ईरान में जन्मे उमर खैय्याम कई उल्लेखनीय गणित और विज्ञान की खोज की। उमर ख़ैय्याम (1048–1131) फ़ारसी साहित्यकार, गणितज्ञ एवं ज्योतिर्विद थे। इनका जन्म उत्तर-पूर्वी फ़ारस के निशाबुर (निशापुर) में ग्यागरहीं सदी में एक ख़ेमा बनाने वाले परिवार में हुआ … पढ़ना जारी रखें कौन थे उमर खैयाम, जिन्हें गूगल ने दी श्रद्धांजलि ?

नज़रिया – क्या चुनाव आयोग पक्षपात कर रहा है ?

चुनाव आयोग द्वारा, पश्चिम बंगाल में सातवें चरण के चुनाव प्रचार का समय एक दिन घटाने का आदेश विधि विरुद्ध है। 19 मई को आखिरी चरण का चुनाव है और नियमतः 48 घन्टे पहले यानी 17 मई को सायं 5 बजे तक सभी दल चुनाव प्रचार कर सकते हैं। सातवें चरण के लिये जो अधिसूचना लागू की गयी है उसमें यही समय सीमा प्रचार के … पढ़ना जारी रखें नज़रिया – क्या चुनाव आयोग पक्षपात कर रहा है ?

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर चीन और भारत के बीच खाई बढ़ती ही जा रही है

जब चीन का सरकारी मीडिया दावा करता है कि भारत में एक बार फिर से मोदी सरकार ही आएगी तो सारे मोदी समर्थक आगे बढ़ बढ़ कर यह खबर शेयर करते हैं लेकिन, जब वही चीन का सरकारी मीडिया कहता है कि मोदी सरकार अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर फेल नजर आ रही है तो मोदी समर्थक साफ कन्नी काट जाते हैं. दो दिन पहले ही … पढ़ना जारी रखें अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर चीन और भारत के बीच खाई बढ़ती ही जा रही है

नज़रिया- यह बंगाल की अस्मिता पर हमला है

कल अमित शाह जब मध्य कोलकाता के धर्मतल्ला से उत्तरी कोलकाता में विवेकानंद के निवास तक ‘जय श्री राम’ के उद्घोष के साथ रवाना हुए उसी समय यह साफ़ नजर आ रहा था कि यह चुनावी रोड शो नहीं, बंगाल के खिलाफ भाजपा का एक रण-घोष है । बंगाल की संस्कृति को पैरों तले रौंद डालने की धृष्टता का ऐलान है । जेएनयू, हैदराबाद विश्वविद्यालय … पढ़ना जारी रखें नज़रिया- यह बंगाल की अस्मिता पर हमला है

वृक्षविहीन सड़कों का शोकगीत

अपने देश के ज्यादातर शहरों की तरह पटना का तापमान साल दर साल बढ़ता जा रहा है। अभी गर्मी की शुरुआत में यह 44 डिग्री के पार है। इसकी वजह से जमीन के भीतर जल का स्तर बीस फ़ीट से भी ज्यादा नीचे जा चुका है। यह विपत्ति अकारण नहीं। शहर की सड़कों के विस्तार और नए फ्लाईओवर तथा भवनों के निर्माण के नाम पर … पढ़ना जारी रखें वृक्षविहीन सड़कों का शोकगीत

अमित शाह का रोड शो, बंगाल में बवाल और विद्यासागर का अपमान

कल कोलकाता में जो कुछ हुआ वह बेहद दुःखद और निंदनीय है। चुनाव प्रचार में रोड शो की यह जो नयी परम्परा पड़ गयी है वह कभी कभी मुझे राजाओं के शोभा यात्रा की तरह लगती है। वैसा ही ऐश्वर्य, वैसी ही पुष्पवर्षा, वैसे ही विजय दंभ से भरे नेता। उन्माद से भरे समर्थक। और वैसे ही उन्माद से उभरते घोष। जनता के बीचों बीच … पढ़ना जारी रखें अमित शाह का रोड शो, बंगाल में बवाल और विद्यासागर का अपमान

झूठा निकला अमित शाह का दावा, उपद्रव करते नज़र आये भाजपाई

बंगाल सुर्ख़ियों में है, और उससे भी ज़्यादा सुर्खियों में है ईश्वरचंद्र विद्यासागर. बुधवार ( 14 मई 2019 ) को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का कोलकाता में एक रोडशो था. जिसमें शामिल होने बाहर से भाजपा कार्यकर्ता कोलकाता पहुंचे थे. अमित शाह के रोड शो के दौरान कोलकाता के विद्यासागर कॉलेज  के छात्रों ने काले झंडे दिखाये. जिसके जवाब में भाजपा की रैली की तरफ … पढ़ना जारी रखें झूठा निकला अमित शाह का दावा, उपद्रव करते नज़र आये भाजपाई

विकल्प के न होने की अवधारणा लोकतंत्र विरोधी है

लोकसभा चुनाव 2019 के छह चरण पूर्ण हो चुके हैं, और अब केवल अंतिम चरण जो 19 मई को समपन्न होगा शेष है। अभी तक जो चुनाव हुए हैं, उनके बारे में सोशल मीडिया पर अलग अलग लोग अलग अलग तरह से अपना अनुमान बता रहे हैं। चूंकि आदर्श आचार संहिता के अनुसार न्यूज़ चैनल और अखबार एक्जिट पोल के परिणाम नहीं दिखा सकते क्योंकि … पढ़ना जारी रखें विकल्प के न होने की अवधारणा लोकतंत्र विरोधी है

हम एक अवैज्ञानिक और अनाड़ी भारत बना रहे हैं

बम फोड़कर भारतवासियों की जान लेने के मुक़दमे, जेल और ज़मानत भूल जाइए, जाँबाज़ शहीद अधिकारी को श्राप से मार डालने का दावा भी भुला दीजिए। लेकिन भोपाल की कथित साध्वी गाय पर हाथ फेर कर बीपी घटाने का टोटका प्रचारित कर रही हैं? तीन बार ऑपरेशन से बचने वाली मरीज़ गोमूत्र को कैंसर का इलाज बता रही है? हम कैसा भारत बनाने जा रहे … पढ़ना जारी रखें हम एक अवैज्ञानिक और अनाड़ी भारत बना रहे हैं

मंटो की एक रचना – मैं कहानीकार नहीं जेबकतरा हूँ

सआदत हसन मंटो (11 मई 1912 – 18 जनवरी 1955) उर्दू के प्रसिद्ध लेखक थे, जो अपनी लघु कथाओं, बू, खोल दो, ठंडा गोश्त और बंटवारे पर लिखी मार्मिक और  चर्चित कहानी, टोबा टेकसिंह के लिए प्रसिद्ध हुये थे । कहानीकार होने के साथ-साथ वे फिल्म और रेडिया पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। अपने छोटे से जीवनकाल में उन्होंने बाइस लघु कथा संग्रह, एक … पढ़ना जारी रखें मंटो की एक रचना – मैं कहानीकार नहीं जेबकतरा हूँ

व्यक्तित्व – 1857 के भुला दिए गए नायकों में से एक ” शहीद पीर अली खान “

आज 10 मई के दिन भारत के पहले स्वाधीनता संग्राम की वर्षगांठ पर देश 1857 के शहीदों की याद कर रहा है। उनमें ज्यादातर उस दौर के राजे-रजवाड़े और सामंत थे जिनके सामने अपने छोटे-बड़े राज्य को अंग्रेजों से बचाने की भी चुनौती थी। स्वाधीनता संग्राम के विस्मृत नायकों में पीर अली खां जैसे कुछ ऐसे लोग भी थे जिनके पास न तो कोई रियासत … पढ़ना जारी रखें व्यक्तित्व – 1857 के भुला दिए गए नायकों में से एक ” शहीद पीर अली खान “

जब मोदी सरकार की अनुमति से पठानकोट एयरबेस में हुआ था आईएसआई का प्रवेश

नौसेना के जहाज पर, राजीव गांधी के साथ, विदेशी नागरिक गये थे या नहीं इस पर अलग अलग खबरें आ रही हैं। सरकार ही सच क्या है बता सकती है। सरकार को सच की जांच करके बताना चाहिये। करदाताओं और नागरिकों का यह अधिकार है कि राजकीय धन, साधन आदि के दुरूपयोग पर सभी तथ्यों से अवगत रहें। वैसे भी सभी रक्षा प्रतिष्ठान विशेष सुरक्षित … पढ़ना जारी रखें जब मोदी सरकार की अनुमति से पठानकोट एयरबेस में हुआ था आईएसआई का प्रवेश

फ़र्ज़ी कंपनियों का बहीखाता लेकर जीडीपी बढ़ाने का खेल पकड़ा गया – रविश कुमार

जीडीपी ( GDP ) का आँकड़ा बढ़ा-चढ़ा कर बताने के लिए फ़र्ज़ी कंपनियों का इस्तमाल किया गया है। नेशनल सैंपल सर्वे (NSSO) ने एक साल लगाकर एक सर्वे किया मगर उसकी रिपोर्ट दबा दी गई। पहली बार सर्विस सेक्टर की कंपनियों का सर्वे हो रहा था। इसके लिए NSSO ने कारपोरेट मंत्रालय (Corporate Ministry ) से सर्विस सेक्टर की कंपनियों का डेटा लिया। जब उन … पढ़ना जारी रखें फ़र्ज़ी कंपनियों का बहीखाता लेकर जीडीपी बढ़ाने का खेल पकड़ा गया – रविश कुमार

भारतीय चुनावों का इतिहास – चुनावी मुद्दे, सुरक्षा बल और सैन्य कार्यवाहियां

लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान जो प्रमुख मुद्दे उभर कर आये हैं उनमें एक मुद्दा सेना, सुरक्षा बल और सैनिक कार्यवाहियों का है। सुरक्षा बलों, यानी सेना, पुलिस, अर्ध सैनिक बलों पर सामूहिक चर्चा या जन चर्चा से कोई परहेज नहीं करना चाहिये क्योंकि यह सब तंत्र भी सरकार के अंग है और सुरक्षा, शांति व्यवस्था किसी भी सरकार की प्रथम प्राथमिकता होती है। पर … पढ़ना जारी रखें भारतीय चुनावों का इतिहास – चुनावी मुद्दे, सुरक्षा बल और सैन्य कार्यवाहियां

नज़रिया – भारत का आधार धर्म नहीं धर्मनिरपेक्षता है

सन् 85 के बाद पैदा होने वालों के साथ एक बड़ी दिक्कत हो रही है। इनमें से अधिकतर को देश और धर्म के बीच फर्क करना नहीं आ रहा है। ये दिक्कत कश्मीर में उन लोगों के साथ भी है जो सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं, और उनके भी साथ है जो बाकी भारत में मुसलमानों को पीटते हुए भारत मां की जय बोल रहे … पढ़ना जारी रखें नज़रिया – भारत का आधार धर्म नहीं धर्मनिरपेक्षता है