USA और यूरोप में इस्लामोफोबिया को यूं मात दे रहे हैं मुसलमान

बात अभी ताज़ा ही है फीफा वर्ल्ड कप फुटबॉल टूर्नामेंट में फ़्रांस ने विजेता की ट्रॉफी पर क़ब्ज़ा किया था और उस फ़्रांस की टीम में सात विदेशी मूल के मुस्लिम खिलाडी थे, इन खिलाडियों ने न सिर्फ क्रोशिया को हराया बल्कि यूरोप में फैले प्रोपेगंडे ‘इस्लामोफोबिया’ को भी मुंह तोड़ जवाब दिया है.

न सिर्फ अमेरिका बल्कि यूरोपियन देशों में ये प्रोपेगंडा दशकों से परवान चढ़ रहा है, और इसे परवान चढाने के लिए करोड़ों डॉलर्स खर्च किये जा रहे हैं, ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ प्रोपेगंडे की वजह से ही परवान चढ़ा है, इसे हवा देने में आइसिस जैसे कई प्रायोजित आतंकी संगठन सबसे आगे हैं, कई सरफिरे गुमराह होकर इनके हत्थे चढ़कर आतंकी वारदातें करते हैं.

वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार यूरोप में 1970 से 2016 तक इस तरह की आतंकी 18,811 घटनाओं में कुल 11,288 लोग मारे गए, ये सब हमले लोगों ने टूरिस्ट वीज़ा पर जाकर नहीं किये बल्कि इन यूरोपीय देशों में नागरिकता लिए इन्ही विदेशी मूल के लोगों ने प्रेरित होकर किये हैं

यूरोप और अमेरिका में इस्लामोफोबिया प्रोपगंडे से लड़ने के लिए हर बार हर आतंकी घटना के फ़ौरन बाद वहां के मुसलमान अपने मुल्क के लोगों के दुःख बांटने आगे आ जाते हैं, चाहे वो ब्रिटैन हो, ऑस्ट्रेलिया हो या फिर फ़्रांस हो, यही वजह है कि करोड़ों डॉलर्स खर्चने के बाद भी इन इस्लाम विरोधी गिरोह को वो कामयाबी नहीं मिल पा रही जिसकी इन्हे उम्मीद है.

विदेशों में नागरिकता लेकर बसे मुसलमान इस प्रोपेगंडे को हर बार बेक फुट पर धकेल देते हैं, चाहे इसके लिए वो ‘I’m Muslim, Not a Terrorist, Would You Hug Me ? जैसे सोशल एक्सपेरिमेंट्स करें या फिर Talk To A Muslim जैसी मुहीम चलाकर शंकित लोगों की इस्लाम के प्रति भ्रांतियां दूर करें. भी दो दिन पहले ही अपने मुल्क में भी ट्वीटर पर सौहार्द और भाईचारे के लिए Talk To A Muslim नाम से हैशटैग चलाया था.

Talk To A Muslim मुहिम नयी बिलकुल नहीं है, ये फोटो जो आप देख रहे हैं इंग्लैंड का है और 21 दिसंबर 2015 का है, कैंब्रिज लाइब्रेरी के बाहर खड़ी ये महिला हैं मोना हैदर और इनके साथ खड़े हैं इनके शौहर सेबेस्टियन रॉबिन्स, इन्होने बोर्ड लगा रखा है जिस पर लिखा है “Talk to a Muslim, और दूसे बोर्ड पर लिखा है “Ask a Muslim”, मोना हैदर को अपने मुसलमान होने पर फख्र है और इस्लाम की बुनियादी तालीम और नज़रिये को उन लोगों के साथ शेयर करती हैं जो लोग इस्लाम के या मुसलमानों के खिलाफ गलत नजरिया या भ्रांतियां रखते हैं.

मोना हैदर अपने साथ डोनट्स का बॉक्स भी रखती हैं बोर्ड पर उन्होंने लिख भी रखा है, वो लोगों के साथ संवाद भी करती हैं और उन्हें डोनट्स के साथ कॉफ़ी भी पिलाती हैं, जुमा और सनीचर को वो अपने शौहर के साथ लाइब्रेरी के बाहर घंटों खड़े रहकर लोगों से मिलते हैं और उनकी गलत फहमिया दूर करते हैं, दो दिन में ही मोना ने सौ से ज़्यादा लोगों के साथ संवाद कर उनकी गलत फहमियां दूर कीं.

मोना हैदर की इस मुहिम की दिल खोलकर सराहना की गयी थी, यहाँ तक कि मोना ने अपनी इस मुहिम को जब फेसबुक पर शेयर किया था तो उस वक़्त उसके 4000 से ज़्यादा शेयर हुए थे, मोना हैदर को आप फेसबुक पर जाकर फॉलो कर सकते हैं, फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज सकते हैं.

हालाँकि ये बात 2015 की है मगर मैंने इसका ज़िक्र इसलिए किया है कि इस तरह के सोशल एक्सपेरिमेंट्स उससे पहले से ही और आज भी लगातार कई मुल्कों में लगातार जारी हैं, इसमें सबसे ख़ास है Visit My Mosque (मेरी मस्जिद में तशरीफ़ लाइए) है, जो हर साल यूरोप से लेकर अमरीका तक किया जाता है, जहाँ इसी तरह से गैर मुस्लिम लोगों को इस्लाम को जानने की दावत दी जाती है, इस्लाम और मुसलमानों के प्रति उनकी गलतफहमियां संवाद और सवाल जवाबों से दूर करने की कोशिश की जाती है, बाक़ायदा चाय नाश्ते के साथ.

वो लोग अपने आमाल से इस्लाम की बुनियादी तालीम और उसूलों को पेश कर लोगों को इस्लाम की खूबियां बताते आ रहे हैं, यही वजह है कि यूरोप और अमेरिका में लोग तेजी से इस्लाम क़ुबूल कर रहे हैं, ओर एक हम हैं जहां फिरक़ों मसलकों की अलग अलग मस्जिदें बन रही हैं, भाड़े के मौलाना रोज़ टीवी पर बैठकर मुसलमानों की भद्द पिटवा रहे हैं, औरतों से पिट रहे हैं पीट रहे हैं, सोच लीजिए ऐसे में मुल्क और दुनिया को हम कैसी नज़ीर पेश कर रहे हैं.

बात को ख़त्म करते हुए यही कहूंगा कि सभी जानते हैं कि अमरीका और यूरोप में इस्लाम तेज़ी से फ़ैल रहा है, तो इसकी वजहों के पीछे इस्लाम के लिए की जाने वाली इन गुमनाम हीरोज़ की बेलौस मेहनत भी है, फ़्रांस के सात मुस्लिम खिलाडी हों या फिर मोना हैदर जैसे मुसलमान यह लोग जब तक ज़िंदा हैं, इस्लामोफोबिया को मुंह की खानी ही पड़ेगी.

काश हमारे मुल्क के मुसलमानों, मौलानाओं और मुस्लिम रहनुमानों में भी ऐसा ही जज़्बा ऐसा ही इत्तिहाद पैदा हो जाए तो इंडोनेशिया के बाद मुसलमानों की सबसे बड़ी आबादी वाले ‘हम’ इस हालत में कभी न हों.

खबर का Source :-

https://www.bostonglobe.com/metro/2015/12/21/couple-sets-ask-muslim-booth-cambridge/aOiTfhSp8wtM5zYhqaWdnO/story.html

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