क्या लोकतांत्रिक देश में आलोचनात्मक कार्टून शेयर करना, राजद्रोह है ?

खबर है, की फेसबुक पर एक कार्टून पोस्‍ट करने के आरोप में छत्तीसगढ़ के पत्रकार कमल शुक्‍ला के ऊपर देशद्रोह का मुकदमा कायम हुआ है.

  • मीडिया विजिल की एक ख़बर के मुताबिक़ कमल शुक्‍ला के खिलाफ कांकेर जिला के कोतवाली थाने में मुकदमा कायम हुआ है.
  • कांकेर के एसपी के मुताबिक कमल शुक्‍ला के ऊपर आइपीसी की धारा 124-ए (राजद्रोह) के तहत मुकदमा कायम किया गया है.
  • इस संबंध में राजस्‍थान के किसी व्‍यक्ति ने शिकायत दर्ज करवायी थी. मामला रायपुर की साइबर सेल से कांकेर पुलिस को भेजा गया था.

ज्ञात होकि  कमल शुक्‍ला छत्‍तीसगढ़ के जाने माने पत्रकार हैं जिन्‍होंने पत्रकारों पर हमले के खिलाफ लगातार अपनी आवाज़ उठायी है और पत्रकार सुरक्षा अधिनियम के लिए आंदोलन के अगुवा रहे हैं व इससे जुड़ी संघर्ष समिति के अध्‍यक्ष हैं. शुक्‍ला भूमकाल समाचार के संपादक हैं और बस्‍तर क्षेत्र में फर्जी मुठभेड़ों पर वे लगातार आवाज़ उठाते रहे हैं.

कमल शुक्ला ने इस बात का ज़िक्र अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में भी किया है

वो लिखते हैं – पता चला है कि मेरे ऊपर भी राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज कर लिया गया है । कल्लुरी द्वारा दर्ज कराए गए मामलों पर अभी जमानत भी नही हो पाया है । कोई बात नही , मेरा अभियान रुकेगा नही । असली देशद्रोहियों भाजपाइयों ने लोगों को भृमित रखने के लिए आईटी सेल ही नही बनाया बल्कि सच बताने वालों को जेल और कानूनी उलझन में फंसाने के लिए लीगल ( इनलीगल) सेल भी बनाया है । मैं इसी ग्रुप का शिकार हुआ हुं । लोकतंत्र और देश बचाने की मुहिम जारी रहेगी ।

इस मामले में समाजसेवी हिमांशु कुमार ने फ़ेसबुक पोस्ट करके कमल शुक्ला के बारे में जानकारी दी है. हिमांशु कुमार लिखते हैं

कमल शुक्ला को मैं अनेक वर्षों से जानता हूँ , वो जनता के पत्रकार हैं

  • कमल शुक्ला ने मुठभेड़ के नाम पर आदिवासियों की हत्याओं के अनेकों मामले उठाये हैं
  • नक्सलियों द्वारा पत्रकारों के ऊपर हमलों के विरोध में उन्होंने बस्तर के अबूझमाड़ से होकर जगलों के बीच से एक पदयात्रा करी थी. कमल शुक्ला निडर इंसान हैं
  • वे साम्प्रदायिकता जातिवाद और आर्थिक लूट के खिलाफ काम करने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं
  • उनके खिलाफ पुलिस ने पहले भी कई फर्जी मामले बनाये थे, आज उनके खिलाफ पुलिस ने राजद्रोह का मामला दर्ज़ किया है

कमल शुक्ला ने फेसबुक पर एक कार्टून पोस्ट किया था.

  • इस कार्टून में न्यायपालिका को पीड़ित महिला के रूप में और न्यायपालिका की दुर्गति करने वाले ऊंचे पदों पर बैठे लोगों को पशु रूप में चित्रित किया गया है
  • हांलाकि सर्वोच्च न्यायालय सरकार को बुरी तरह डांट चुका है कि सोशल मीडिया की किसी पोस्ट के आधार पर किसी को गिफ्तार मत करो

सर्वोच्च न्यायलय ने आईटी एक्ट की धारा 66A को रद्द कर दिया है, लेकिन छत्तीसगढ़ पुलिस ने तो गुंडागर्दी करने और रमन सिंह के व्यक्तिगत नौकर की तरह काम करने की कसम खा रखी है.

इससे पहले पत्रकार विनोद वर्मा को फर्जी मामले में गिरफ्तार करके सेक्स काण्ड में फंसे मंत्री को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस ने सभी कानून तोड़े थे. अब पत्रकार कमल शुक्ला के ऊपर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज़ कर दिया है . पुलिस पत्रकार को डरा कर उन्हें चुप रहने को मजबूर करने के फ़िराक में है .

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