दलितों के बाद दलित सांसदों की नाराज़गी से घबराई भाजपा

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की. उनकी मुलाकात ऐसे समय हुई है जब उत्तरप्रदेश से दलित समुदाय के कुछ भाजपा सांसदों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखे हैं.

पीएम मोदी ने शनिवार को चारों दलित सांसदों की नाराज़गी की चिंता करते हुए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिल्ली बुलाया और इस विषय पर न केवल चर्चा की  बल्कि इस मसले पर विस्तृत रिपोर्ट भी यूपी बीजेपी से मांगी है.

सूत्रों ने बताया कि योगी रविवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भी मिलेंगे. उनसे मुलाकात के दौरान 10 अप्रैल को अमित शाह के लखनऊ दौरे की रूपरेखा तय होगी.

ज्ञात होकि यूपी के चार दलित बीजेपी सांसदों की राज्य सरकार के खिलाफ नाराजगी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत गंभीरता से लिया है.

कुछ दिन पूर्व ही बहराइच की सांसद सावि​त्री बाई फुले ने एससी, एसटी एक्ट को लेकर अपनी ही सरकार को घेरा था.

इसके बाद रॉबर्ट्सगंज से सांसद छोटेलाल, नगीना लोकसभा सांसद डॉ. यशवंत सिंह और इटावा के सांसद अशोक कुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य और केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठा उठाया है.

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बीजेपी सांसद उदित राज ने भी शनिवार रात आरोप लगाया कि इस सप्ताह के शुरू में भारत बंद के दौरान प्रदर्शन के बाद से देश के विभिन्न हिस्सों में दलित समुदाय के सदस्यों को प्रताड़ित किया जा रहा है

वर्तमान लोकसभा में 121 में से 67 दलित सांसद बीजेपी के ही हैं. इनमें उत्तर प्रदेश की सभी सुरक्षित 17 लोकसभा सीटें भी शामिल हैं. वहीं यूपी की विधानसभा में 87 दलित विधायक बीजेपी के टिकट पर चुन कर आए हैं. इस लिहाज से देखें तो 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनावों में दलित वोट का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी के साथ गया था.

सूत्रों की मानें तो पीएम मोदी ने योगी आदित्यनाथ को साफ तौर से ये बता दिया है कि इस मसले को जल्द से जल्द सुलझा लिया जाए. साथ ही इस बात की भी हिदायत दी कि जरूरत पड़े तो नाराज सांसद से पार्टी बैठकर बात करे और इनकी समस्या का समाधान किया जाए.

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