ईराक से भारत आये भारतीयों के शव, ISIS के आतंक का हुए थे शिकार

इराक में कुख्यात आतंकी संगठन ISIS के हाथों मारे गए भारतीय नागरिकों के शव भारत आ गए हैं. विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह इराक से 38 भारतीयों के शवों को लेकर अमृतसर लौट आए हैं. इन 39 भारतीयों के शव लाने के लिए खुद विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह एक अप्रैल को इराक के लिए रवाना हुए थे. मृतकों में पंजाब से 27, बिहार से 6, हिमाचल से 4 और पश्चिम बंगाल से 2 लोग शामिल थे. जून 2014 में उत्तरी मोसुल शहर पर कब्जा करने के तुरंत बाद ISIS ने इन मजदूरों को अगवा कर लिया था. जिसके बाद उनकी मौत को लेकर संशय बना हुआ था.

वीके सिंह ने दी शवों को सलामी

उत्तरी इराक में ताबूतों को विमान में चढ़ाये जाने पर भारत के विदेश राज्य मंत्री वी के. सिंह ने उन्हें सलामी दी. सिंह ने आतंकवादियों की आलोचना की और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी सरकार के रुख को जाहिर किया. आईएस को ‘‘बेहद क्रूर संगठन” बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश के नागरिक आईएस की गोलियों के शिकार हुए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘हमलोग हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ हैं.”

सुषमा स्वराज ने दी थी जानकारी

20 मार्च को भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में जानकारी दी कि,इराक के मोसुल से अगवा किए गए सभी 39 भारतीय मारे गए हैं.इन भारतीयों की हत्या कुख्यात आतंकी संगठन ISIS ने की है. उन्होंने बताया कि ISIS द्वारा अगवा किए गए सभी 39 भारतीयों के शव बादुश में एक साथ एक पहाड़ में दफनाए गए थे.

मोसुल में क्या हुआ था

तकरीबन चार साल पहले जून 2014 में इराक की राजधानी बगदाद में भारतीय अधिकारियों ने बताया कि उनका 40 भारतीय मजदूरों से संपर्क टूट गया है.ये सारे मजदूर मोसुल में सरकारी कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे.

तब से लेकर अब तक उनके बारे में भारत या इराकी सुरक्षा बलों को कोई सुराग नहीं मिला था. मोसुल और आसपास के इलाके में ISIS का कब्जा होने के कारण वहां से जानकारी नहीं निकल पा रही थी.

उसी वक्त आशंका जताई गई थी कि इन भारतीय मजदूरों को ISIS ने अपहरण कर लिया है.इसके बाद से भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय लगातार कोशिश कर रहा था कि किसी भी तरह अपहरणकर्ताओं और अपहरण किए गए लोगों से संपर्क हो जाए.मोसुल पर जब दोबारा इराकी सेनाओं ने कब्जा किया और ISIS की हार हुई तो उम्मीद जगी कि इन लोगों के बारे में पता चल सकेगा.

भारतीय मजदूरों के अपहरण के बाद ISIS ने 55 बांग्लादेशी मजदूरों को छोड़ दिया. इन लोगों के साथ मिलकर एक भारतीय हरजीत मसीह भी ISIS के चंगुल से बच निकलने में कामयाब रहा.महीस ने दावा किया था कि उसे छोड़कर सभी भारतीयों को ISIS के आतंकवादियों ने मार डाला है. लेकिन उस वक्त सरकार ने मसीह के दावों पर यकीन नहीं किया.

जुलाई में स्वराज ने दावा किया था कि विदेश राज्य मंत्री जनरल वी के सिंह को उस वक्त इराक यात्रा के दौरान सूचना मिली थी कि अगवा किए गए भारतीय इराक की बादुश जेल में हैं.विदेश मंत्री ने खुफिया जानकारी के हवाले से बताया था कि भारतीयों से IS आतंकवादी खेतों में काम करा रहे थे. उनको कब्जे में लेकर बादुश जेल में डाल दिया गया. अंतिम जानकारी यही थी.इसके बाद जब ISIS और इराकी फौजों के बीच लड़ाई शुरू हुई तो उसमें बदुश जेल पूरी तरह नष्ट हो गया. और उस वक्त इराकी सरकार ने ऐलान किया था कि जेल में कोई भी कैदी नहीं था.

करीब साल भर पहले इराकी विदेश मंत्री अल जाफरी भारत आए थे तो उन्होंने बताया था कि भारतीय जिंदा हैं या मारे गए इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन इराकी सरकार अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है.पिछले साल जुलाई में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि जब तक सबूत नहीं मिल जाते तब तक किसी को मृत नहीं कहा जा सकता.

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