नज़रिया – ये सारे शहर में दहशत सी क्यूँ है?

कुछ सालों से भारत में धार्मिक त्यौहार एक त्यौहार के तौर पर नहीं मनाकर धौंस, धमकी, भयभीत करने और अपना मानसिक प्रदूषण निकालने का जरिया ज़्यादा बना गए हैं, पिछले दिनों टोंक में और देश के कई शहरों में हिंदू नव वर्ष के शुभारंभ के अवसर पर निकाले गए जुलूस के दौरान आगज़नी, मारपीट और हिंसा की घटनाये हुई थीं.

आज आदर्श पुरुष भगवान् राम के जन्मदिन यानि रामनवमी के पावन अवसर पर भी रामनवमी जुलूस को लेकर बिहार के औरंगाबाद और कैमूर जिले में तनाव और हिंसा की ख़बरें आयी हैं, कल ही पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले में भी इसी मुद्दे को लेकर हिंसा की खबर आई थी

सोशल मीडिया पर भी इन त्यौहारों से पहले कथित स्वयंघोषित राष्ट्रवादियों की वाल देखिये खुले आम इन उत्सवों और त्यौहारों के बहाने मार काट के आह्वान साफ़ नज़र आते हैं, मगर प्रशासन शायद इन्हे मूक सहमति देता है, या फिर उसे इन घटनाओं को रोकने में बिलकुल भी रूचि नहीं है.

यहाँ दो तस्वीरें आपके सामने हैं, देश का हिन्दू हो या मुस्लिम या सिख या ईसाई, कोई भी नहीं चाहेगा कि धार्मिक उत्सवों में बवाल हो, हिंसा हो, मारकाट हो. और ना ही देश का आम आदमी कभी त्यौहारों के बहाने ऐसे फसाद करने में सहभागिता निभाता है, इनके पीछे सांप्रदायिक संगठन और उसके लोग ही होते हैं जो चाहते ही यही हैं कि इसके बहाने ही झगड़ा फसाद हो और वो लोग अपनी कुत्सित योजनाएं पूरी करें.

आज की ही बात है राजस्थान के जोधपुर में रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान कथित एक झांकी में राजसमंद के क्रूर हत्यारे शंभू लाल रैगर को एक आसन पर बैठा कर जुलूस में शामिल किया गया, ये क्या है ? कौन हिन्दू भाई ये पसंद करेगा कि मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान् राम के जन्मदिन की झांकियों में किसी हत्यारे की इस तरह की झांकी भी हो.

 

ये मुठ्ठी भर लोग ऐसा करके न सिर्फ आदर्श पुरुष भगवान् राम का अपमान कर रहे हैं बल्कि हिन्दू भाइयों को भी गलत ढंग से पेश कर रहे हैं, आज इस जोधपुर की कथित झांकी मामले पर कई जगह देखा है कोई भी हिन्दू भाई शंभू लाल रैगर को इस तरह से रामनवमी के बहाने महिमामंडन करने वाली इस कुटिल हरकत का समर्थन करता नज़र नहीं आया.

किसी भी धार्मिक जुलूस में किसी भी धर्म के या संगठन के लोग अगर इस बहाने अपनी कुत्सित भावनाएं तृप्त करने की कुटिलता करता हैं, या इन जुलूसों के बहाने आमजन या दूसरे धर्म के लोगों को निशाना बनाते हैं तो सब को मिलकर इनको रोकना ही होगा, आप मुसलमान हैं और अगर कोई आपकी ही किसी धार्मिक जुलूस में इस तरह की हरकतें करता है, तो उसका विरोध कीजिये, उसे किसी भी तरह रोकिये, इस तरह के मुठ्ठी भर ये उत्पाती देश, धर्म, समाज और लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा हैं.

यदि ऐसा नहीं किया गया तो भविष्य में देश में मनाये जाने वाली हर धार्मिक त्यौहार या उत्सव से पहले शहरों में कर्फ्यू लगने लगेंगे, स्कूल, कॉलेज,,बाजार बंद रहा करेंगे, शेष धर्म के लोग अपनों को उस दिन घरों में बंद रखा करेंगे.

सोच लीजिये आपको कैसा कल चाहिए ?

शायर राजेश रेड्डी जी ने शायद इस दौर की इस कड़वी हकीकत को पहले ही भांप लिया था, और अपने दिल की बात कुछ इस तरह पेश की थी –

ख़ज़ाना कौन सा उस पार होगा,
वहाँ भी रेत का अम्बार होगा

ये सारे शहर में दहशत सी क्यूँ है ?
यक़ीनन कल कोई त्यौहार होगा

बदल जाएगी उस बच्चे की दुनिया,
जब उस के सामने अख़बार होगा

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