मेरा अपना भारत

मेरा अपना भारत मेरे बचपन से शुरु होता है,बिजनोर में गुज़रे हुए वक़्त से,जहां बस से उतर जाने के बाद अपने ननिहाल के मुस्लिम मोहल्ले में घुसने से पहले वहां की शुरुआत “राम” के चौराहे से होती थी,जहाँ कोने ही पर एक मंदिर मौजूद था,और यकीन मानिए वो बिजनौर के सबसे बड़े इलाकों में से एक मुस्लिम इलाके की शुरुआत ऐसी ही है,जहां थोड़ी दूरी पर “जामा मस्जिद” भी थी.

यही था वो भारत जो मेने देखा,महसूस किया,जहां मगरिब(दिन छुपते हुए का वक़्त) मग़रिब की अज़ानो से गूंजता हुआ था और अज़ानो के बाद सब्ज़ी मंडी के मंदिर मे कीर्तन शुरू हो जातें थे,दूसरी तरफ “सुनारों वाली गली” से होते हुए मदरसे के बच्चे “सुनारों” को सर झुकाकर नमस्ते करते हुए निकल जातें थे,यकीन मानिए ये अजीब नही लगता था,क्योंकि ये सब खुद में रच बस जाने की चीज़ थी.

खुद ही में समा जाने की चीज़ थी,इस चीज़ को मैने बहुत करीब से देखा,जहां मंदिर के बराबर में बैठें एक शख्स अपनी दुकान के कोने में रखी मूर्ति के सामने जोड़ने के बाद हमे झट से पहचान लेतें थे और नाम भी लेने से गुरेज करते थे और “भांजा” ही कहा करतें थे,क्योंकि ये मोहल्ले की मोहब्बत थी जो पीढ़ी दर पीढ़ी से ऐसी ही चली आ रही थी,जहाँ दूसरे कोने पर दूसरा मुस्लिम मोहल्ला शुरू होने से पहले ही “साई बाबा का मंदिर” था,जिसके प्रसाद बाटने वाले ने कभी हमसे पूछा नही की आप लेंगे क्या,बस दे दिया हमे,क्योंकि वो प्रसाद सबका था.

उस इलाके की तरफ जातें हुए फिर एक मस्जिद थी और उसके बराबर में एक और मन्दिर था,बिल्कुल वेसा ही दृश्य था जैसा आप गूगल पर ढूंढते फिरते है,यकीन मानिए ये बिल्कुल भी अलग नही था,जुदा नही था,सब कुछ ऐसा ही था,ऐसा ही है,क्योंकि ये मेरे बचपन का भारत था,साथ रहने वाला,इस बचपन के भारत मे मिठाई “पूजा घण्टे वाले” के यहां से ही आती थी,और समोसे “राम के चोराहे” के हलवाई ही के होते थे और, अगर कुछ ज़रूरी सामान था वो “रब्बानी” ही देता था, क्योंकि यहां सवाल नही थे मोहब्बते थी,खुद के अंदर मौजूद बसी हुई मोहब्बत, हमने आँखों से वो नज़ारा देखा है जो हमारे नाना के एहतराम में बड़े बड़े पैसे वाले टिका लगाएं खड़े रहते थे और उनके हाथ बंधे रहते थे,क्योंकि एहतराम था उनके बुज़ुर्गी का,वो बुज़ुर्गी जो उन्हें “हकीम जी” कहलवाया करती थी.

वो उन्हें अपना बड़ा मानते थे, उनसे दुआएं कराते थे. यकीन मानिए ये बिल्कुल भी अलग नही था,जुदा नही था,क्योंकि ये भारत खुद का था अपना था,इस भारत ही को याद कर लीजिए क्योंकि ऐसा ही भारत आपके अंदर भी बसा है, झँखझोरिये खुद को,और देखिए कि यही वो भारत है जिसकी इसी खूबसूरत तस्वीरों को खत्म किया जा रहा है,समझिये जानिए और अहमियत समझिये इसकी,क्योंकि ये भारत ऐसा ही है, इसे मत बदलने दीजिये वरना सब कमज़ोर,खोखला और अधूरा हो जायेगा,समझिये, ज़रूरी है आपके लिए, देश के लिए… खुद के लिए. #वंदे_ईश्वरम

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