गांधी के साथ,या गांधी के ख़िलाफ़?

एक एक कर बारी बारी चारों गोलियाँ सीने को चीरते हुए उसमे समा गई और महज़ उन बंदूक से निकले बारूद ने एक युग को,एक समाज को और एक विचारधारा को महज कुछ गोलियों से ढेर कर दिया,वो बूढ़ा जिस्म वही ढेर हो गया,और “हे राम” के साथ एक महात्मा को एक “हैवान” ने मौत के घाट उतार दिया,लेकिन क्या गांधी उस दिन मर गए थे? क्या गांधी महज़ चार गोलियों के लग जाने से मर जाते?क्या ये मुमकिन था?

महात्मा गांधी ने देश के लिए उम्र गुज़ारी,देश से लेकर विदेश तक हिंसा के विरुद्ध वो खड़े हुए,और एक आंदोलन को सरपरस्ती दी,ज़रा अंदाज़ा लगाइये उस वक़्त में उस अंग्रेजी क्रूर सरकार के खिलाफ खड़ा होना कितनी हिम्मत का काम है,लेकिन गांधी तब भी खड़े हुए और “धर्म” की बुनियाद पर देश के बंटवारे के विरुद्ध सेक्युलर मुल्क भारत की नींव रखी,उसे एक शक्ल दी सूरत दी लेकिन पूरी उम्र नफरतों के खिलाफ लड़ने वाले “गांधी” खुद नफरत का शिकार हुए,और उन्हें दिनदहाड़े मार दिया गया।

Mahatma Gandhi Murder: Mohanlal Turns Approver

बूढ़े जिस्म ओर झुकी कमर लिए चलने वाला वो शख़्स तब नफरतों से लड़ रहा था,और आज अपनी मौत के बाद भी आजतक बराबर लड़ रहा है। जी हां मौत के बाद भी अपने विचारों से,अपने सिद्धांतों से और अपनी विचारधारा से,लड़ रहा है,असल मे जिस दिन “गांधी” को गोलियों से छलनी कर दिया गया था उस दिन ही देश की विचारधारा दो धडों में बंट गयी थी,एक वो थी जिसने गांधी को मारा था और एक जो गांधी के साथ थे।

गांधी का रास्ता अहिंसा का था, मोहब्बत का था,खूबसूरती का था और एक ऐसी नींव पर रखा था जहां मज़हब सिर्फ अपने लिए था और बात करने और बात रखने की और अपने अपने विचारों को रखने की इजाज़त थी। लेकिन गांधी के हत्यारों का रास्ता “धर्म” के नाम पर अधर्म का था,नफरत का था,और दूसरों को कमतर समझने की बात का था,बात इसी के बीच सारी बातें चली थी और आज तक चल रही है यही असल बहस है जिसमे या तो आप गांधी के साथ है या खिलाफ है।

इस बात को हर एक अमनपसंद, सेक्युलर और संविधान के साथ खड़े रहने वाले और उसे मानना और इस बात को खुद समझना होगा,की उसके पास “अहिंसा” और “हिंसा” दोनो है,उसे किसे चुनना है? “गांधी” कि “अहिंसा” को या उस नफरत को मज़हब के नाम पर एक टूकड़ा कर चुकी है,इसलिए देश,संविधान के लिए “गांधी” के साथ खड़े हो जाइए,और याद रखिये की ये देश गांधी का था है और रहेगा।

महात्मा गाँधी का जाना महात्मा गांधी को और मज़बूत करता है इसलिए गांधी जी के लिये खड़े रहिये,गांधी के लिए गांधी के मुल्क के लिए गांधी के मुल्क में फैली नफरतों के खिलाफ.

असद शेख

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