जूतों में रख चुरा ले गया 90.5 लाख रुपये

जब बाड़ ही खेत को खाने लगे या यूँ कहे की घरवाला ही घर से चोरी करने लग जाये तो आखिर विश्वास किस पर किया जाये. पर ये भी सच है कि चोर कोई भी हो आखिर वो पकड़ा ही जाता है, कुछ ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है देवास बैंक नोट प्रेस में.

जहाँ आम आदमी को अभी तक 200 का नोट सभी नागरिकों को देखने को ही  नसीब नहीं हुए, वहाँ ये साहब के जूतों में ही 200 के नोटों की  गड्डियां मिली.

मध्य प्रदेश के देवास बैंक नोट प्रेस में नोटों की चोरी का अजीबो गरीब मामला पकड़ में आया है. पिछले आठ माह से हो रही चोरी का आरोपी प्रेस का डिप्टी कंट्रोलर मनोहर वर्मा को गिरफ्तार  किया गया है और छापेमारी के दौरान 90 लाख रुपये जब्‍त किए गए हैं.

मामले प्रकाश में आने के बाद जब वर्मा के ऑफिस के चेम्बर की तलाशी ली गई तो उनके चेम्बर से करीब 26 लाख 9 हजार रुपए बरामद हुए. वहीं उनके घर की तलाशी में भी 64 लाख रुपए मिलने की बात सामने आई है.

मिडिया खबरों में बताया जा रहा है कि अब तक करीब 90 लाख रुपए बरामद हो चुके हैं. इतनी भारी मात्रा में मुद्रा मिलने के बाद मनोहर वर्मा पर कार्यवाही की जा रही है.

बैंक में नोट चोरी की सूचना मिलने पर छुट्टी पर चल रहे बीएनपी के जीएम एमसवी वैलप्पा शनिवार को दौड़े-दौड़े बीएनपी पहुंच गए हैं. और सूत्रों के अनुसार जीएम से भी चैकिंग व सुरक्षा व्यवस्था पर दिल्ली से आई टीम पूछताछ कर रही है. रिजेक्ट नोटों का ब्योरा भी लिया जा रहा है.

मामले की सूचना प्रबंधन ने बैंक नोट प्रेस पुलिस थाना को दिए जाने के बाद पुलिस ने अपने स्तर पर कार्यवाही शुरू कर दी.

इस घटना की जानकारी मिलते ही देवास के ASP भी थाने पहुंचे. देवास पुलिस ने आरोपी मनोहर वर्मा को अपने गिरफ्त में ले लिया है.

परन्तु गौर करने वाली बात है कि इतने बड़े और महत्वपूर्ण केंद्रीय संस्थान पर सुरक्षा के मामले में इतनी बड़ी चूक हो गई कि कोई व्यक्ति लाखों रुपये अपने घर तक ले जा पहुंचा. हालांकि प्रबंधन फिलहाल कुछ भी कहने से बच रहा है.

कौन है चोर ?

आरोपी का नाम मनोहर वर्मा है. मनोहर वर्मा 1984 में क्लर्क के तौर पर बीएनपी में नियुक्त हुआ था. वह पहले कंट्रोल सेक्शन में न होकर प्रिंटिंग सेक्शन में था. मनोहर वर्मा सुपरवाइजर स्तर का अधिकारी था और उस श्रेणी में पदस्थ था जहां त्रुटिपूर्ण नोटों की छंटाई का काम होता है. अब मनोहर वर्मा नोट वेरिफिकेशन सेक्शन का हेड है.

कुछ दिनों पहले ही नोट वेरिफिकेशन सेक्शन में ज्वॉइन किया था, इससे पहले वह फिनिशिंग-1 शाखा में पोस्टेड था. बीएनपी सूत्रों के अनुसार, जिस नोट वेरिफिकेशन ब्रांच में मनोहर वर्मा नया अधिकारी बनकर आया था.

क्या था चोरी का तरीका ?

मनोहर वर्मा उच्च पदस्थ अधिकारी था, इसलिए न तो उसके लॉकर की जांच होती थी और न ही ऑफिस में आते-जाते उसकी तलाशी ली जाती थी. इसी का फायदा उठाकर मनोहर वर्मा कपड़ों और जूते में छिपाकर नोटों की चोरी करता था. वह सर्दियों में जैकेट में छिपाकर भी नोट ले जाता था.

बीएनपी में छह हिस्सों में नोट छपता है. इसमें चौथी और पांचवीं स्टेप में त्रुटिपूर्ण नोट अलग किए जाते हैं. इसी हिस्से में वर्मा पदस्थ था.

इसी दौरान वो जवानों की नजरे बचा कर नोटों की गड्डी डस्टबिन में फेंक देता था. और फिर मौका पाकर नोटों की गड्डी निकालकर डस्टबिन या लॉकर में रख लेता था. डिपार्टमेंट हेड होने की वजह से उसके लॉकर की जांच भी नहीं होती थी.

कैसे फसा ?

बताया जा रहा है कि सहकर्मियों की सूझबूझ से आरोपी अधिकारी को पुलिस ने रंगेहाथ पकड़ लिया गया. दरअसल, उसकी गिरफ्तारी से एक दिन पहले ही सीआईएसएफ जवान को उस पर शक हुआ था. उसके बाद उस पर जवान ने कड़ी निगरानी शुरू कर दी. वहां दो जवान घूमते हुए बाहर पहरा देते रहते हैं.

सीआईएसएफ के एक जवान को मनोहर वर्मा को डस्टबिन में कुछ फेंकते हुए शक हो गया. दरअसल मनोहर वर्मा ने डस्टबिन के पास लकड़ी का एक बॉक्स रख रखा और वह सिक्योरिटी गार्ड्स की निगाह बचाकर नोटों की गड्डी उसी बॉक्स में फेंक देता था.

बाद में मौका पाकर वह नोटों की गड्डी को कपड़ों और जूते में छिपा लेता और ऑफिस से बिना चेकिंग के सुरक्षित निकल जाता. सीआईएसएफ के जवान को जब मनोहर वर्मा पर बार-बार डस्टबिन में कुछ फेंकने को लेकर शक हुआ तो उसने अपने उच्च अधिकारी को सूचित किया.

सीआईएसएफ और बीएनपी के वरिष्ठ अफसरों की उपस्थिति में जब आरोपी वर्मा की तलाशी ली गई तो उसके जूते में से 200 स्र्पए के रिजेक्ट नोट की दो गड्डियां मिली.

अधिकारियों ने मनोहर वर्मा को रंगेहाथों पकड़ने के लिए वहां लगे मूवेबल सीसीटीवी कैमरे को डस्टबिन की ओर फिक्स कर दिया. बस अगले ही दिन यानि शुक्रवार को मनोहर वर्मा लकड़ी के बक्से में नोटं की गड्डी फेंकते हुए रंगेहाथों पकड़ लिए गए.

देश में कुल चार जगह होती है नोटों की छपाई

वर्तमान में देश में चार प्रेस हैं, जहां नोटों की छपाई होती है. इनमें से देवास बैंक नोट प्रेस और नासिक की प्रेस भारत सरकार के उपक्रम सिक्योरिटी प्रिटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसपीएमसीआईएल) का हिस्सा है, जबकि मैसूर और सालबोनी (प. बंगाल) रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (बीआरबीएनएमपीएल) के अधीन है. बीआरबीएनएमपीएल एक नामित कंपनी है, जो करेंसी नोट की डिजाइन, प्रिंटिंग प्लेट्स और गर्वनर के हस्ताक्षर एसपीएमसीआईएल को उपलब्ध कराती है.

 

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