विशेष – देश में औसतन हर 4 घंटे में एक गैंगरेप की वारदात होती है

तकरीबन पांच साल पहले की बात है एक आन्दोलन ने बहुत तेज़ी पकड़ी थी,मामला था ठंड में दिल्ली की सड़क पर हुआ एक विभत्स और शर्मनाक बलात्कार जिसमे चलती हुई बस में बलात्कार कर एक युवती को मौत के घात उतार दिया गया था, वो बेगुनाह लड़की वो “निर्भया” मारी गयी,इस दिल दहलाने वाली घटना ने दिल को पसीज दिया था हर एक आँख नम थी उस “निर्भया” के लिए सब उसे अपनी बेटी बता रहने थे |

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हजारों की तादाद में लोग सडकों पर उतार आये ,और सड़क पर उतरने के बाद लोगों के आक्रोश की आग का ही असर रहा की उस बेगुनाह को इंसाफ मिला | मगर क्या इतनी सख्ती? इतने आन्दोलन से रुकाव हुआ? क्या बलात्कार रुक गये? इस बात का जवाब दायी है मगर सच है नही,आज भी बलात्कार हो रहें है |

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जिस सन्दर्भ में हम भारतीय बलात्कार जेसी अमानवीय घटनाओं को लेते है देखतें है समझतें है और उससे नफरत करतें है उसी समाज में बलात्कार जेसी घटनाओं का बढना हमे कई सवालों के घेरे में डाल देता है,और हमे सोचने पर मजबूर करता है की क्यों? ऐसा क्यूँ? क्या वजह है की ऐसा हो रहा है? और इससे भी भयंकर मामले है जो नेशन क्राइम ब्यूरों में ज़ाहिर आंकड़े बता रहें है |

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक 2016 में देशभर में बलात्कार के 34,651 मामले दर्ज हुए। 2015 में यह संख्या 25 हजार थी। एक साल में दस हजार की बढ़ोतरी। बलात्कार का शिकार होने वाली में तीन साल की बच्ची से लेकर 60 साल तक की बुजुर्ग महिलाएं रहीं। इनमें से 33,098 महिलाएं ऐसी थीं, जिन्हें उनके जानकारों ने ही अपनी हवस का शिकार बनाया।

हरियाणा में बीते दिनों में हुए रेप की घटनाओं रेप की ऐसी दो वारदातें हुई जिससे साल 2012 में हुई निर्भया हत्याकांड की वारदात याद आ गई। इस घटना ने देश को झिंझोड़कर कर रख दिया था। कुछ ऐसा ही घिनौना अपराध हरियाणा के जींद और पानीपत की दो बहादुर बेटियों के साथ हुआ।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक-

  • देश में औसतन हर 4 घंटे में एक गैंग रेप की वारदात होती है।
  • हर दो घंटे में रेप की एक नाकाम कोशिश को अंजाम दिया जाता है।
  • हर 13 घंटे में एक महिला अपने किसी करीबी के द्वारा ही रेप की शिकार होती है।
  • 6 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ भी हर 17 घंटे में एक रेप की वारदात को अंजाम दिया जाता है।
  • महिलाओं के यौन उत्पीड़न और बलात्कार के 31 फीसदी मामले अभी अदालत में लंबित हैं।

ये आंकड़े ये बयान कर देने के लिए काफी है की ये एक बड़ी समस्या है और दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी इसमें हो रही है,और विभत्स हो रही है और अब तो हालात ये है की निडर होकर अपराधी इन चीज़ों को अंजाम दे रहें है | लेकिन कानून के मजबूत होने बावजूद भी कोई भी हल सामने नहीं आ रहा है जो सोचने वाली स्थिति है |

 

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