एडवेंचर्स में भी नाम कमा रहा है, देश का ये प्रतिष्ठित संसथान

आई. आई. टी. रूड़की सिर्फ शिक्षा और खेल जगत में ही नहीं बल्कि साहसिक कार्यो में भी अपना अपना नाम कमा रही है.  यह देश का सबसे प्राचीन तकनीकी संस्थान है. यहाँ के स्टूडेंट्स पढाई के साथ-साथ साहसिक  कार्यो में भी भाग लेते रहे है. बीते अक्टूबर माह में आई. आई. टी. रूड़की के हिमालयन अन्वेषक क्लब के 15 सदस्ययी दल ने विश्व के सबसे ऊँचे माउंटेन पास, कालिंदी पास (ऊंचाई 19,500 फ़ीट) को चढ़ने का कदम उठाया.

दल का नेतृत्व कर रहे भूपेंद्र वर्मा ने बताया कि उनका दल 30 सितम्बर को रूड़की से रवाना हुआ और गंगोत्री, भोजवासा, नंदनवन,वासुकीताल, सीता ग्लेशियर होते हुए 9 अक्टूबर को कालिंदी बेस पँहुचा. कालिंदी बेस कि ऊंचाई तक़रीबन 19,000 फ़ीट है और रात को यहाँ तापमान शून्य से 12 डिग्री नीचे पहुँच गया था.

 

भारीबर्फ़बारी के कारण  आगे का रास्ता बंद हो चुका था। इस वजह से दूसरे दल वाले वासुकीताल से ही लौट गए थे. अभी यहाँ बर्फ की 3-4 फ़ीट परत जमी थी जिस पर चलने पर पैर 1 -2 फ़ीट अंदर धंस रहे थे. एक एक कदम चलना जान जोखिम में डालने के बराबर था।

ऐसी बर्फ पर चलना आम आदमी के बस की बात नहीं है. हमारे दल ने हिम्मत नहीं हारी और 9 अक्टूबर की रात 3 बजे आगे की और कदम बढ़ा दिए. ऑक्सीजन की कमी और कंपकपी सर्दी को इस ऊंचाई पर महसूस किया जा सकता था।

कुछ दूर और चलने के बाद वहाँ के ग्लेशियर और जमी बर्फ के हालत बिगड़ते गए। न जाने कौनसा ग्लेशियर कब खिसक जाये और पूरा दल अंदर फंस जाये। हालाँकि कोई भी इन हालात में वापस जाने को तैयार नहीं था लेकिन खराब बर्फ के कारण पूरी टीम को वहाँ से वापस लौटना पड़ा।

इस ऊंचाई तक चढ़ना ही अपने आप में एक चुनौती है और युवा वर्ग के लिए मिशाल भी.  हिमालयन अन्वेषक क्लब के सचिव मनीष गुप्ता ने बताया कि इस एक्सपीडिशन का मकशद युवाओ को अडवेंचरउस क्षेत्र में प्रेरित करने के साथ ही गंगोत्री क्षेत्र के ग्लेशियर से सैंपल इकट्ठा करना था. जिनके अध्ययन से ग्लोबल वार्मिंग एवं क्लाइमेट चेंज जैसे बड़े मुद्दों को आसानी से जाना जा सकता है. इस दल ने  गंगोत्री, चतुरंगी, सतोपंथ, सीता एवं कालिंदी ग्लेशियर से करीब 100 सैंपल लिए है जिनका भविष्य में अध्ययन करके पहाड़ी एवं धरातल पर हो रहे क्लाइमेट चेंज को समझने में सुविधा मिलेगी.

 

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