राजस्थान में गोचर भूमि बचाने के लिए संघर्ष

सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भी राजस्थान में गौचर भूमि की कोई सुध लेने वाला नहीं है. लगभग राज्य के हर तहसील और जिला मुख्यालय पर बार बार शिकायत के बाद भी सूध नहीं ली जा रही है  और सरकार मनमाफिक दामों पर ऊँची पहुँच वालों को दे देती है ऐसा ही एक मामले में पिछले एक सप्ताह से तहसील कार्यलय पर धरना दिया जा रहा है .

मामला  चूरू जिले में सुजानगढ़  तहसील के निकटवर्ती गांवों में गोचर भूमि को बचाने के लिए ग्रामीणों का धरना करीब एक सप्ताह से धरना जारी है. ग्रामीण गांव की गोचर भूमि को बचाने के लिए तीन-चार माह से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों की अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है.

पर्यावरण बचाओ और अतिक्रमण हटाओ जन संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीणों ने शॉर्ट टाइम परमिट आवंटित जगह पर प्रदर्शन किया और सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द खनन पट्टे निरस्त किए जाए, नहीं तो उनका आंदोलन उपखंड कार्यालय पर प्रदर्शन और भूख हड़ताल का रूप धारण कर लेगा.

पूर्व सरंपच हुकमाराम चैधरी ने जानकारी दी, कि सांसद राहुल कस्वा और विधायक खेमाराम मेघवाल को भी मामले से अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में खासा रोष व्याप्त है.

क्या है पुरा मामला

चुरू जिले की सुजानगढ़ के चरला पंचायत के सरपंच शेराराम मेघवाल ने बताया कि खनन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामपंचायत को सूचना दिए बिना ही सर्वे कर खनन पट्टे जारी कर दिए गए. उन्होंने बताया कि इस भूमि का उपयोग ग्रामीण गोचर भूमि के रूप में करते हैं और ग्रामीण गोचर भूमि को बचाने के लिए कृत संकल्पित हैं. उन्होंने बताया कि पशुओं को चराने के लिए ग्रामीणों के पास अन्य कोई भूमि नहीं है.

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