गुजरात में भाजपा के कमज़ोर होने के क्या मायने हैं

कैसे समझें मौजूदा राजनीतिक स्थिति को? वो स्थिति जो बहुत कुछ बता भी रहीं है,और बहुत अपने अंदर छुपा भी रही है,मगर जो भी है उसकी तस्वीर उसका माहौल सिर्फ और और 2019 के लिए ही है,और यही वजह है की सत्ता और काबिज़ भाजपा इसमें कोई कमी नही छोड़ रही है,और वो जी जान से इस कोशिश में है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करें.

मगर खेल इतना आसान है नही,भाजपा सच मे मज़बूत है,लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ भाजपा ही मज़बूत है? और अब जब भाजपा कई उपचुनाव,लगातार हार गईं है तो सिर्फ उसे मज़बूत कहना तो ईमानदारी नही है, मगर अब के हालात ज्यों के त्यों ऐसे है जैसे वाजपेयी जी के कार्यकाल के खत्म होने के वक़्त थे,वाजपेयी जी सबके ‘नेता’ थे,ओर इंडिया ‘शाइन’ कर रहा था मगर हुआ क्या? भाजपा हारी और सत्ता से बाहर हो गई.

अब इस बात को जितना राजनीतिक हलकों में तमाम लोग जानते है,उससे बेहतर मोदी और शाह की टीम जानती है,इसलिए वो कोई कमी नही छोड़ रहीं है,योगी जी की ‘दीवाली’ हो या मोदी जी का ‘केदारनाथ’ जाना हो ये सब का सब बैकअप है, ‘विकास’ के नारे का,क्योंकि भाजपा जानती है की उसका ‘विकास’ अब इतना असरदार नही है,अच्छा ये बात कितनी सही है ये तो गुजरात चुनाव बता ही देंगे,क्योंकि भाजपा की जीत गुजरात से होकर गुज़रती है.

मगर सवाल जितना भाजपा का है उससे दोगुना राहुल का भी है कि वो कितने परिपक्व है? मगर गौरतलब ये है कि राहुल के ही नेतृत्व पंजाब जीत चुकी कांग्रेस इसी साल राहुल को ‘अध्यक्ष’ भी बना देगी, तब भी क्या भाजपा राहुल को नजरंदाज करेगी? मगर क्या अपनी सबसे अहम नेता स्मृति ईरानी जी को भाजपा को चुनाव के लिए वहां भेजती? असल में बात कुछ ऐसी है कि भाजपा बस राहुल गांधी को कमज़ोर दिखाना चाहती है,क्योंकि ये उन्हें मज़बूत करता है.

अब राहुल भी मंझे हुए नेता की तरह अपनी चाल चल रहे है,वो गुजरात की तैयारियों में जुटे है वो भी चुपचाप और उसी चुपचाप में उन्होंने ‘हार्दिक’,’अल्पेश’ और ‘जिग्नेश’ पर डोरे डालें है,और ये बात कम से कम भाजपा की नींद खराब कर देगी,और इसके अलावा कांग्रेस को चाहिए भी क्या,मगर राहुल और कांग्रेस के इर्द गिर्द घूमता ये खेल कांग्रेस अहमद पटेल की जीत से शुरू होकर अल्पेश ठाकोर के कांग्रेस में आने के ऐलान तक सही सिद्ध हुआ,मगर आगे का खेल अभी बाकी है। और इस खेल में अभी और चाल होंगी और और बातें होंगी और मात होंगी,मगर एक बात सिद्ध है कि भाजपा और कांग्रेस के साथ साथ ये गुजरात चुनाव लोकसभा चुनावों के लिए मैदान तैयार करेगा.

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