एक मुसलमान का मुसलमानों से कुछ सवाल

कुछ हज़ार कुर्ते में खर्च,पूरे महीने स्टाइल की तैयारी और गुटखे से मुंह भर कर चौराहों पर खड़े होकर अपनी “कौम” से उसके मसाइल से दिक्कतों से और “सवालों” से दूर नौंजवानों से आप उम्मीद क्यों रखवा रहें है?

आप उम्मीद रखिये उनसे जो पढं रहें है,बात कर रहें है,लेकिन नही आप उनसे सवाल नही करते आप उनसे चिढ़ते है,और उन्हें “कुरीतियों” पर घेरते है,और और नही मिलती तो बनाई जाती है,उनसे कभी ये बात नही करते है तुम्हारी कम्युनिटी पढाई क्यों नही कर रही है,नोकरियाँ क्यों नही है,या मोहल्लों में एमसीडी वाले सफाई क्यों नही कर रहें है.

ये कभी आप क्यों नही पूछते है? और पूछना होता है या जानना होता है तो उनसे जानते है आप क्यों नही समझते है ये समाज “दलितों से भी बदतर है”,इसमे भी कई हिस्से है,हर एक हिस्सा अलग अलग सोचता है,अलग अलग हैसियत रखता है.

लेकिन नही आप थोड़ा सा कामयाब होते है,बड़े बड़े मीडिया हाउसेज में जाते है,कंपनियों में जाते है और ‘मॉडर्न’ हो जाते है और आपको मुस्लिम बस्तीयों से बू आने लगती है,”ये तो ऐसे ही होते है” लगने लगते है,और आप दिल खोलकर जहां आप पढ़े है,लिखे है,बड़े हुए उन्हें जी खोलकर कोसने लगते है.

और उनके नौजवानों को कोसने लगते है, इलाकों को गंदा बताने लगते है,पूरी की पूरी कम्युनिटी को हो कोसने लगते है, और इससे भी ज़्यादा आप हर एक मसले पर मुंह भर भर कर बुरा कहते है और मुस्लिम नाम होते हुए, मुस्लिमों ही को”रूढ़िवादी”, “कट्टर”, “जाहिल” और अनपढ़ कहकर “अलग” नज़र भी आने लगते है.

लेकिन कभी आपने सोचा है कि आप जहां है वहां से कुछ सुधारों की कोशिश ही कि जाएं? चलिये पूरा पहाड़ नही उठा सकतें तो एक ईंट ही इधर से उधर कर दें,सोचा है? क्यों नही सोचा?

चलिये आपने बुरा कहा,बुरे है,आपने कट्टर कहा,कट्टर है,लेकिन सुधार की भी एक कोशिश होती है आपने की?और वो भी तब जब आप जानते है ये हालात क्यों हैं, आप सबसे ज़्यादा बेहतर कर सकतें है,लेकिन नही आपने कुछ नही किया.

आपने बस कोसा, जी भर के,चलिये माना एक तबका जाहिल है,मगर एक को आपकी ज़रूरत भी है न? सवाल बहुत मूल है,जुड़ा है कि “दलितों” के लिए अम्बेडकर स्पेशल तो नही आये थे?कांशीराम अलग तो नही थे,उन्ही में से थे,वही थे या नही,आप असल मे समझते हुए भी नासमझ बन रहें है और कह रहै है कि “सत्तर सालों में क्यों नही सुधरे हालात”.

आप भी सत्तर सालों से एलीट ही है, “अलग” ही है,इसलिए मुस्लिम भी पिछड़े ही है,परेशान ही है,सवाल तो मुस्लिमों ही से है और आप भी मुस्लिम ही है…

#वंदे_ईश्वरम

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