आज़ादी 70 साल बाद “हम भारत के लोग” क्या भूल रहे हैं?

हम भारत के लोग,यानी हम भारतीय,130 करोड़ भारतीय वही भारतीय जो अब “आज़ादी” के सत्तर साल पुरे करने जा रहें है,अपने देश के “बड़ों” की विरासत को आगे ले जा रहें है और,दिन दूनी रात चोगुनी तरक्की करने की कामना से काम रहें है,सब अपनी अपनी जगह काम कर रहें है,यानि सब अपना काम कर रहें है,और देश तरक्की भी कर रहा है. लेकिन इस … पढ़ना जारी रखें आज़ादी 70 साल बाद “हम भारत के लोग” क्या भूल रहे हैं?

समाज के घिनौने चहरे को जगज़ाहिर करने के लिये तुम्हें “वीराँगना” बनना होगा

पिछले दिनों एक बडे शहर में एक बड़ी घटना हुई घटना बड़ी इसलिए थी क्योंकि इसमें सब कुछ बड़ा बड़ा था। एक बड़ी पार्टी का बड़ा नेता, बडे नेता का बड़ा बिगडेल बेटा,बड़ी सी गाड़ी में,बडे सरकरी अफसर की बड़ी ‘निडर’ बेटी के साथ बड़ी बदतमीज़ी करने लगा। हम विकास बराला और वरालिका की बात कर रहे है हरियाणा बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष के बेटा की एक … पढ़ना जारी रखें समाज के घिनौने चहरे को जगज़ाहिर करने के लिये तुम्हें “वीराँगना” बनना होगा

स्मृति : भारत छोड़ो आंदोलन (9 अगस्त 1942)

आज नौ अगस्त … भारत छोडो आन्दोलन की स्मृति साथ ले आया है. यह वही आन्दोलन था जिसने भारत की स्वतंत्रता सुनिश्चित कर दी. चूँकि मैं बलिया से हूँ और इस आन्दोलन ने बलिया को पन्द्रह दिन तक अंग्रेज प्रशासन से पूर्ण आज़ादी दिला दी. बाद में अंग्रेज सेना ने फिर से लौटकर कब्ज़ा किया। गांधी जी का 9 अगस्त 1942 के उद्घोष ‘करो या … पढ़ना जारी रखें स्मृति : भारत छोड़ो आंदोलन (9 अगस्त 1942)

वर्तमान भारतीय राजनीति का चरित्र घटिया और भयावह हो चला है

मुद्दे कई हैं नजर में। उनमें से कुछ अहम मुद्दे आज के हिंदुस्तान की जो डरावनी सूरत पेश करते हैं, उन्हें लिखना लाज़िमी जान पड़ा तो लिख रहा हूँ।  सबसे अव्वल तो यह कि मैं बिहार से हूँ और सब दिन बिहार में ही रहा। इसलिए बिहार को जानता भी हूँ अच्छे से। बड़ा प्यार है बिहार और उसके गौरवशाली अतीत से। गुजरात की कोई … पढ़ना जारी रखें वर्तमान भारतीय राजनीति का चरित्र घटिया और भयावह हो चला है

जलते घरो को देखने वालो पूष का छप्पर आपका है आग़ के पीछे तेज़ हवा है आगे मुकद्दर आपका है

“जलते घरो को देखने वालो पूष का छप्पर आपका है आग़ के पीछे तेज़ हवा है आगे मुकद्दर आपका है” इन पंक्तियों का उपयोग यहाँ कुछ विशेष लोगो के लिए किया जा रहा है वो लोग जो पिछले कुछ घंटो से अपने साहसिक कार्यो से भगवा वाह वाही लूट रहे है भारतीय राजनीति को निचले से निचले स्तर ले जाने में ऐसे लोग अपना पूरा … पढ़ना जारी रखें जलते घरो को देखने वालो पूष का छप्पर आपका है आग़ के पीछे तेज़ हवा है आगे मुकद्दर आपका है

नीति वो रूपरेखा है जो लक्ष्य को रूप देती है पहचान देती है

नीति शब्द का प्रयोग आप और हम रोज़ाना करते रहते है कभी गंभीर भाव से कभी वैचारिक भाव से कभी प्रश्न भाव से। लेकिन इसकी गहराई में में उतरकर कम ही लोग देखते है। इसका वास्तविक अर्थ, परिभाषा,प्रयोग अलग अलग लोग अलग अलग तरह से करते है जो होना भी चाहिए यह शब्द ही ऐसा है जो जितने लोगो तक जाता है उतने ही अर्थो … पढ़ना जारी रखें नीति वो रूपरेखा है जो लक्ष्य को रूप देती है पहचान देती है

डॉ अंबेडकर पूजने की “वस्तु” नहीं..अपनाये जाने वाले “लीजेंड”(दिव्यचरित्र) हैं

मैं, फ़िक्रमंद हूँ कि वर्णाश्रम के आख़िरी पायदान पे लटका दिये गए “शूद्र” अपना “ज़िंदा अस्तित्व” मनुवादी निज़ाम मे कैसे ढूंढ सकते हैं? उसमें भी ख़ासकर अतिशूद्र वर्ग ?  इससे बुरा और क्या हो सकता है कि अछूतों के अंदर भी “महाअछूत” वर्ग है जो “इनके” पढ़े लिखे वर्ग के लिए भी उतना ही घृणित है, जितना ब्राह्मणों के लिए “ये शिक्षित दलित”. अचंभित हूँ … पढ़ना जारी रखें डॉ अंबेडकर पूजने की “वस्तु” नहीं..अपनाये जाने वाले “लीजेंड”(दिव्यचरित्र) हैं