गोरखपुर प्रकरण : लापरवाही और सरकारी लीपापोती का ज्वलन्त उदाहरण

इस धरती पर अगर सबसे कीमती चीज़ कोई है तो वो है जीवन जिसकी हिफाज़त हम सभी करते है जीवन का अधिकार सभी अधिकारों में प्रथम स्थान रखता हैऔर इस अधिकार की रक्षा करने का ज़िम्मा हम अपनी सरकार को देते है। क्या हो अगर हमारी चुनी हुई सरकार ही इस अधिकार की धज्जियां उड़ाए वह का मंज़र भयावह होगा जैसा गोरखपुर में हो रहा है

गोरखपुर : बीआरडी मेडिकल कालेज में भर्ती बच्चे (फोटो सोर्स : गूगल इमेज)

आम जनता के मरने व घायल होने की खबरें पहले भी आती रही है लेकिन सरकार का प्रकोप छोटे बच्चो पर इस तरह पड़ेगा इसका अंदाज़ा बहुत कम था।

सभी मौते अस्पताल में हुई इसलिए अस्पताल प्रशासन पर प्रश्न उठाना लाज़मी है लेकिन ओक्सिजन गैस सप्लाई करने वाली फ़र्म व राज्य सरकार भी इन हत्याओं में बराबरी की भागीदार है।

अस्पताल प्रशासन का ढीला रवैया,फ़र्म पर दोषारोेपण, फ़र्म का अस्पताल पर निशाना साधना,सरकार का इस सम्बन्ध अपनी ज़िम्मेदारी न समझना आम जनता के जीवन के लिए खतरे की घंटी है। जीवन की रक्षा करने का ज़िम्मा हर व्यक्ति को स्वयं उठाना चाहिए ऐसी असंवेदनशील व्यवस्था पर थोड़ा भी भरोसा करने से हुई जान/माल की हानि का व्यक्ति स्वयं ज़िम्मेदार होगा कोई प्रशासन कोई सरकार नहीं।

वैसे तो एक माँ के दिल को झकझोरने के लिए उसकी औलाद की मृत्यु ही काफी है लेकिन कुछ नेताओ के घटिया बयानों ने भी उस माँ के कलेजे को बद्दुअओ से भर दिया जिसने अपने 6 माह के बच्चे को सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की वजह से खोया हो।

समय समय पर होने वाली ये घटनाये हमारी सहनशीलता और संवेदनशीलता को परखती है जनता सरकारी लापरवाही को कहाँ तक भूल सकती है व कहाँ तक जागरूक हो सकती है इसको देखती है।

अपनी गलती को छुपाने के लिए राज्य के मुख्येमंत्री अपनी टोली के साथ अस्पताल तक तो पहुंच गए लेकिन न तो बदइन्तेज़मी रोक सके न ही मौतें।

इन सबका ज़िम्मेदार अगर कोई है तो इश्वर है जिसने इन बच्चो के जीवन के इतने ही दिन लिखे थे अस्पताल प्रशासन,सरकार ,आप और हम इस पूरे हत्याकांड में निर्दोष है।

इस प्रकार के हादसों में एक शब्द जो सामान्यत: हम सुनते है वो है “जाँच” हादसे की जांच, दोषियों की जांच, मृतको की जांच, परंतु सरकार यदि अपनी व्यवस्था की जांच करे तो जाने कितने हादसों की गुत्थी सुलझ जायेगी।

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मंत्री स्वच्छ उत्तर प्रदेश स्वास्थ उत्तर प्रदेश का नारा लगाते रहते है ऐसे में इतनी बड़ी प्रशासनिक लापरवाही इनके नारों की और नीयत की दोनों की हवा निकाल देती है।

ये हमारी व्यवस्था की सबसे पुरानी और पकी हुई प्रवति है कि यहाँ कभी कोई दोष स्वीकारा नही जाता इस सरकार के मंत्री भी अपना दोष अगस्त के महीने पर डाल देते है जो ये मौते लेकर आता है इन बेतुके बयानों को सुनने के बाद भी अगर हमारी जनता खामोश रहती है तो इस पूरे हत्याकांड में एक दोषी आप और हम भी होंगे।

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