नीति वो रूपरेखा है जो लक्ष्य को रूप देती है पहचान देती है

नीति शब्द का प्रयोग आप और हम रोज़ाना करते रहते है कभी गंभीर भाव से कभी वैचारिक भाव से कभी प्रश्न भाव से। लेकिन इसकी गहराई में में उतरकर कम ही लोग देखते है। इसका वास्तविक अर्थ, परिभाषा,प्रयोग अलग अलग लोग अलग अलग तरह से करते है जो होना भी चाहिए यह शब्द ही ऐसा है जो जितने लोगो तक जाता है उतने ही अर्थो में,उतने ही रूपो में ढल जाता है

दुनिया का हर व्यक्ति अपने जीवन में लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहा है ऐसे में ये शब्द उस संधर्ष को दिशा दिखलाता है।
नीति वो रूपरेखा है जो लक्ष्य को रूप देती है पहचान देती है। नीति संघर्ष में संयम, बुद्धि देती है। ये तय किये लक्ष्यों को हासिल करने का चरणबद्ध तरीका है। नीति को सिर्फ लक्ष्य तक पहुचने के साधन के रूप में न देखा जाये ये मानव के विचारों की वो देन है जो उस के जीवन को सार्थक रूप से जीने में मदद करती है और जीवन में सकारात्मकता का संचालन करती है।

नीति को जीवन के हर क्षेत्र में अपनाया जाना चाहिए ये सिर्फ सरकारो द्वारा विकास करने की रूपरेखा न हो, इसका प्रयोग और क्रियान्वयन इसके अर्थ की तरह व्यापक हो। नीति बोलने में राम जैसी , न्याय में विक्रमाधित्य,रण में कृष्णा जैसी होनी चाहिए।

नीति किसी विषय विशेष से जुडी हुई नही है, इसकी ज़रुरत जीवन के हर क्षेत्र, हर पड़ाव में महसूस होती है।
इसकी ज़रुरत का बड़ा कारण यही है
इसमें शक्ति है लक्ष्य तक पहुचने की।

नीति नियति को बदलने की शक्ति रखती है। नियति इश्वर द्वारा निर्धारित होती है लेकिन मानव अपनी नियति अपनी नीति से बदल सकता है इस कथन में कोई संदेह नहीं की उचित नीति नियति को बदल सकती है।
कोई मुर्ख/दुष्ट व्यक्ति सही नीति नही बना सकता ये विद्वानों का काम है क्योंकि नीति उच्च मानवीय गुणो की मांग करती है।

सही नीति के साधारण व्यक्ति को देश का प्रथम नागरिक बना सकती है, एक विकासशील राज्य को विकसित राज्य बना सकती है, मनुष्य को उस स्थान तक पंहुचा सकता है जो उसकी नियति में नही होता। इसलिए नीति और नियति में गहरा सम्बन्ध है।

नीति विचारों ,मान्यताओ, अनुभव ,ज्ञान,बुद्धि पर आधारित होती है।
जैसे जिसके विचार वैसी उसकी नीति
अच्छी नीति के लिए शुद्ध विचारो का होना ज़रूरी है।

दृढ़ संकल्प,कार्य क्षमता व्यक्ति की नीति का सहारा होता है।
मनुष्य अपने कर्मो की बाढ़ से नियति के रास्ते बदल सकता है कर्मो की ये ताकत नीति से आती है। ऐसा कहा जा सकता है कि नियति नीति द्वारा निर्धारित होती है।

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