भीड़तंत्र के विरुद्ध उठता जनाक्रोश – #NotInMyname और काली पट्टी कैम्पेन

धन्य है रिलायंस का नेटवर्क जो हमें समय समय पर ये एहसास कराता है कि फेसबुक ही नहीं इंटरनेट और दूरसंचार सेवाओं के बिना भी जीवन सम्भव है।

ये ब्रह्म ज्ञान मुझे पिछले 7 वर्षों में हर बार तब तब मिलता है, जब मैं ससुराल के पुश्तैनी घर जाती हूँ। बहुत कुछ बदल गया पर रिलायंस सेवाएं नहीं। न मैंने बदलने की कोशिश की क्योंकि एक अच्छी बहु की इमेज बनाने में काफी मदद मिली।

आज जब सबके हाथों में यह बीमारी चिमटी हो, आप बुज़ुर्गों के पास बैठकर उनके किस्से सुनो, छोटे बच्चों को सजाओ सँवारों ईद के लिये, स्पेशल फीस्ट बनाओ, वह ज़्यादा मायने रखता है।

  • वैसे भी 4 दिन मेरे यहाँ न रहने से कौन सा युग परिवर्तन होना था। विद्वज्जनों से परामर्श लिया तो उन्होंने भी यही बताया युगपुरुष इस समय यहाँ नहीं हैं तो 3 दिन तक तो युग बिल्कुल भी परिवर्तित नहीं होगा।

खैर….
एक जो अच्छी बात यहाँ देखने मिली, वह यह कि इतने शॉर्ट नोटिस पर भी काली पट्टी अभियान काफी अच्छी तरह पूरा हुआ। सकारात्मक सहयोग मिला।
उससे भी अच्छी बात जो आज न्यूज़फीड देखकर पता चली #Notinmyname कैम्पेन। जंतर मंतर पर प्रदर्शन। अलग अलग शहरों में जारी है।

जो लोग काली पट्टी पर कह रहे थे इससे क्या होगा, धरना दो, संसद चलो, जंतर मंतर चलो ये करो वह करो, उनको तुरन्त ही मौका मुहैया करा दिया गया है। जो कह रहे थे खुशी के त्यौहार पर ये सब क्यों या इज्तिमाई तादाद दिखाने को ईद को भुनाया जा रहा है, उनको भी जवाब मिल गया होगा।

जो भयंकर विक्षिप्त कम्युनल दिन रात ज़हर की खेती कर रहे हैं, उनको भी दोनों ओर से करारा जवाब मिलना शुरू हो गया है।

छोटा सा दीया अंधेरे को रोशन कर सकता है, और ये महज जुमला बिल्कुल नहीं है। निगेटिव लोग इसमें भी दीपक तले अंधेरा देखेंगे। दोष उनका भी नहीं है, उनके मोतियाबिंद का है। वह भी पकेगा, इलाज होगा नया लेंस डलेगा तो विज़न साफ हो जायेगा।
#notinmyname टीम को सैल्यूट।

जो लोग शांतिपूर्ण और सकारात्मक तरीके से जुट रहे हैं उन सबको भी सलाम।

और हाँ ! मैं भारतीय लोकतंत्र की गर्वित नागरिक, उस विचारधारा का सख्त विरोध करती हूँ जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भीड़तंत्र की बर्बरता का समर्थन करती है।

आग को जितना ईंधन मिलेगा, उतना भड़केगी और फिर लगाने वालों का भी लिहाज़ नहीं करेगी, यह मुझे याद है। सभी याद रखें तो सबके हित में बेहतर है….

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