एक तबका है, जिसका काम है ज़हर को बैलेंस करना

एक तबका है,जिसका काम “बैलेंस” करना है,जिसका काम डैमेज कंट्रोल करना है,जिसकात काम “ज़हर” फ़ैलाना है,जिसका काम किसी भी मुद्दे को घुमाना है,ये तबका बहुत चालाकी से किसी भी मुद्दे के सामने कोई भी मुद्दा खड़ा कर देता है,यानी “जुनेद” की बात होगी तो उसके सामने अय्यूब पंडित को खड़ा कर देगा,ठीक वैसे ही जैसे अख़लाक़ के सामने डॉक्टर नारंग को खड़ा किया था। ये … पढ़ना जारी रखें एक तबका है, जिसका काम है ज़हर को बैलेंस करना

भीड़तंत्र के विरुद्ध उठता जनाक्रोश – #NotInMyname और काली पट्टी कैम्पेन

धन्य है रिलायंस का नेटवर्क जो हमें समय समय पर ये एहसास कराता है कि फेसबुक ही नहीं इंटरनेट और दूरसंचार सेवाओं के बिना भी जीवन सम्भव है। ये ब्रह्म ज्ञान मुझे पिछले 7 वर्षों में हर बार तब तब मिलता है, जब मैं ससुराल के पुश्तैनी घर जाती हूँ। बहुत कुछ बदल गया पर रिलायंस सेवाएं नहीं। न मैंने बदलने की कोशिश की क्योंकि … पढ़ना जारी रखें भीड़तंत्र के विरुद्ध उठता जनाक्रोश – #NotInMyname और काली पट्टी कैम्पेन

डरता हूँ कि कहीं इस डर से लोग सच बोलना न बंद कर दें

एक साया सा फ़ैल गया है हर सिम्त दिल के भीतर / और वहीं बैठ गया है चुपचाप आजकल एक डर मन करता है उस डर को उलीच दूँ यहां पर डर को उलीचना और भी ज्यादा डर से भर जाना है. सामने पार्क में खेलता बच्चा जोर से हंसता है और मैं उसकी हंसी सुन डर जाता हूँ कि कहीं कोई उन्मादी भीड़ न … पढ़ना जारी रखें डरता हूँ कि कहीं इस डर से लोग सच बोलना न बंद कर दें

न्यायप्रिय लोगों का मज़ाक उड़ाकर, क्या संदेश देना चाहते हैं परेश

मशहूर समाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने आतंकी भीड़ द्वारा की जा रही हत्याओं के विरोध में अपना आवार्ड लौटा दिया। आवार्ड लौटाने पर भाजपा सांसद परेश रावल शबनम हाशमी का मजाक उड़ा रहे हैं। परेश रावल राजनीति में आने से पहले फिल्म अभिनेता थे, शायद अभी भी हैं। उनकी एक फिल्म है ‘फिर भी दिल है हिन्दोस्तानी’ इस फिल्म में वे एक लड़की के पिता … पढ़ना जारी रखें न्यायप्रिय लोगों का मज़ाक उड़ाकर, क्या संदेश देना चाहते हैं परेश

क्या पूरे डिब्बे में एक भी शख़्स ऐसा नहीं था जिसमें इंसानियत बाक़ी थी – शहज़ादा कलीम

ख़ामोशी तो अब तोड़नी पड़ेगी… क्योंकि इंसानियत अब मर चुकी है… कहाँ हैं फेसबुक पर नफ़रतों से भरे मुल्ला और कटुवा कहकर ग़ाली देने वाले लोग… दीजिये ख़ूब गालियाँ… लेकिन याद रखना यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब देश टकराव का ज़ख्म झेलेगा..और उस वक़्त न तो नफ़रतों के लिए जगह बचेगी और न ही ग़ालियों के लिये.. तब इस देश को … पढ़ना जारी रखें क्या पूरे डिब्बे में एक भी शख़्स ऐसा नहीं था जिसमें इंसानियत बाक़ी थी – शहज़ादा कलीम

देश में कब लगाम लगेगी हत्यारी भीड़ पर और कब थमेगा हत्याओ का सिलसिला

आखिर ये सिलसिला कहाँ रुकेगा? गोहत्त्या के नाम पर उत्तर प्रदेश के दादरी में अख़लाक़ के घर में घुस कर पगलाई भगवा आतंकियों की भीड़ ने उनकी पीट , पीट कर हत्त्या कर दी फिर तो ये सिलसिला चल पड़ा राजस्थान में गाय खरीदने गए पहलु खान की हत्त्या हुई जमशेदपुर लातेहार , झारखण्ड में मिन्हाज की हत्त्या हुई। कोलकाता , जम्मू देश की राजधानी … पढ़ना जारी रखें देश में कब लगाम लगेगी हत्यारी भीड़ पर और कब थमेगा हत्याओ का सिलसिला

एक सभ्य खेल की कवरेज को इतना असभ्य क्यों बना रहे हैं टीवी एन्कर्स

भारत और पाकिस्तान का मैच है,पूरी तेयारी है आखिर क्रिकेट का सबसे बड़ा मुकाबला जो ठहरा,और इससे भी ज्यादा 1947 से लेकर आज तक के तमाम हालात भी सामने है,मगर खेल है हो रहा है और दसूरे मुल्क में हो रहा है तो मसला अलग है,मगर खेल तो खेल ही रहा है और हमेशा ही खेला गया है,लेकिन आज बात दूसरी है की क्रिकेट “जेंटल मैन्स” गेम … पढ़ना जारी रखें एक सभ्य खेल की कवरेज को इतना असभ्य क्यों बना रहे हैं टीवी एन्कर्स

नोटबंदी से आखिर हासिल क्या हुआ ?

08 नवंबर 2016 को नोटबंदी का एलान करते वक़्त बताया गया कि कुल 13.82 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा प्रचलन से बाहर कर दी गई है। थर्ड डिवीज़नर सिविल इंजीनियर अनिल बोकिल और आठवीं पास अर्थशास्त्री बाबा रामदेव की सलाह पर दसवीं पास पीएम ने ज़ोर शोर से दावा किया कि इस से तीन से चार लाख करोड़ रुपये रद्दी हो जाएंगे और काला धन … पढ़ना जारी रखें नोटबंदी से आखिर हासिल क्या हुआ ?

ब्राह्मणराज के लिए ज़मीन तैयार करता सहारनपुर – एक फैक्ट फाईंडिंग रिपोर्ट

ज़ुलैख़ा जबीं सहारनपुर धधक रहा है उसकी आंच में पूर्व नियोजित राजनीतिक रोटी सेंकी जानी है. वर्ण समर्थकों की कुंठा का ज़हर देश के गली मोहल्लों मे निर्बाध बहने लगा है.जिसे कोढ़ में खाज कहा जाए तो ग़लत न होगा. क़रीब आ चुके स्थानीय निकायों के चुनाव और गुजरात एसेम्बली चुनाव में बेबस-बेगुनाह नागरिकों के ख़ून से सिंचित वोटों की फ़सल काटने वालों का एजेंडा … पढ़ना जारी रखें ब्राह्मणराज के लिए ज़मीन तैयार करता सहारनपुर – एक फैक्ट फाईंडिंग रिपोर्ट

फिल्म निर्देशक शादाब सिद्दीक़ी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत

सेवा में, श्रीमान नरेंद्र दामोदर मोदी प्रधानमन्त्री भारत सरकार महोदय, निवेदन यह है कि आपने तीन साल पहले देश के संविधान की शपथ लेकर देश में अच्छे दिन लाने का वायदा किया था, चलिए हम आम लोगों को छोड़ दीजिए साहब, हमें नही चाहिए अच्छे दिन हम इन्ही दिनों में अपना गुजारा चला लेंगे, लेकिन साहब आपसे हाथ जोड़कर विनती है आप कम से कम … पढ़ना जारी रखें फिल्म निर्देशक शादाब सिद्दीक़ी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत

जो हम पर ईमान ना लाए चुनवा दो दीवारों में

इंकलाबी सरजमीं मेरठ के इंकलाबी शायर मरहूम हफीज मेरठी साहब का एक शेर है- आज ये तय पाया है हूकुमत के इजारेदारों में जो हम पर ईमान ना लाए चुनवा दो दीवारों में हफीज साहब ने ये लाइनें तब कहीं थीं, जब जून 1975 में इमरजेंसी लगी थी और उसका विरोध करने वालों को जेल में डाल दिया गया था। तब हफीज साहब ने यह … पढ़ना जारी रखें जो हम पर ईमान ना लाए चुनवा दो दीवारों में

महिलाओ के लिये नर्क़ बनता छत्तीसगढ – ज़िम्मेदार कौन ?

  आज का छत्तीसगढ़ कभी धान का कटोरा कहलाता रहा है. अविभाजित मध्य प्रदेश से 1 नवम्बर 2000 में अलग होकर ये एक राज्य की शक्ल में आया, सत्रह बरस के इस युवा राज्य की जनसंख्या – 2011 की गणना के मुताबिक़ 2 करोड़ 55 लाख थी. जिसमें 1,28,32,895 पुरुष और 1,27,12,303 औरतों की जनसंख्या थी. यहाँ की साक्षरता दर 71 फ़ीसदी है. वैसे तो … पढ़ना जारी रखें महिलाओ के लिये नर्क़ बनता छत्तीसगढ – ज़िम्मेदार कौन ?

देश में बढ़ रही अराजकता के विरुद्ध अपने लबों को कब खोलेंगे प्रधानमंत्री – अकमल बलरामपुरी

बिजनोर में चलती ट्रेन में जिस तरह से एक मुस्लिम महिला के साथ रेलवे के सिपाही ने रेप की घटना को अंजाम दिया उसकी जितनी निंदा की जाए कम है ।खाकी वर्दी जिस पर हिंदुस्तान की जनता का विश्वास रहता है जो इस बात की गवाही देती है कि वो जनता के प्रति हमेशा वफादार रहेगा और हमेशा जनता की हिफाज़त करेगा ।उसी खाकी वर्दी … पढ़ना जारी रखें देश में बढ़ रही अराजकता के विरुद्ध अपने लबों को कब खोलेंगे प्रधानमंत्री – अकमल बलरामपुरी