आलोचना से परे नहीं हैं मोदी

दिल्ली में हारे तो वह मोदी के खिलाफ रेफ्रेंडम नहीं था, बिहार हारे वह भी मोदी की हार नहीं थी, पंजाब में भाजपा अकाली हारे, पश्चिम बंगाल में भी मोदी की हार नहीं थी, केरल की हार भी मोदी खिलाफ जनमत संग्रह नहीं था। लेकिन एमसीडी की हार अरविंद केजरीवाल के खिलाफ रेफ्रेंडम है, उन्हें फौरन इस्तीफा दे देना चाहिए। ‘आप’ हीन भावना से बाहर निकले। उसे एमसीडी में 48 सीटें मिली हैं। जिस पार्टी ने विधानसभा का चुनाव जीत लिया है, उसके लिए जरूरी नहीं कि वह नगरपालिका का भी चुनाव जीते ही। दूसरी बात यह बात जोर शोर से प्रचारित की जा रही है कि अरविंद केजरीवाल को नकारात्मक राजनीति की वजह से हार का सामना करना पड़ा। ये नकारात्मक राजनीति क्या होती है? विपक्षी दलों की आलोचना करना कब से नकारात्मक राजनीति करना हो गया? अरविंद केजरीवाल को रात दिन गालियां देना, उन्हें थप्पड़ जड़ देना, उन पर स्याही फेंक देना क्या सकारात्मक राजनीति है? सभी विपक्षी दलों को नाकारा कहना किस तरह की राजनीति में आता है? एक साजिश के तहत राहुल गांधी को पप्पू साबित कर दिया गया, लोगों ने मान लिया की वह पप्पू हैं। साबित कर दिया कि मोदी के विरोधी देशद्रोही हैं, विकास में बाधक हैं। लोगों ने यह भी मान लिया। यह भी प्रचारित कर दिया कि मुसलमान आतंकवादी हैं, लोगों ने मान लिया। अब जोर शोर से यह झूठ फैलाया जा रहा है कि मोदी की जितनी आलोचना की जाएगी, वह उतना ही मजबूत होंगे। दुर्भाग्य से बहुत लोगों ने इसे सही मानना शुरू कर दिया। कह रहे हैं कि मोदी का आलोचना बंद कर दीजिए, वरना वह कभी नहीं हारेंगे। इसका मतलब यह है कि किसी भी सूरत कोई मोदी की आलोचना न करे, उनकी जय जयकार ही की जाए, उनकी गलत नीति पर सवाल खड़े ने किए जाएं। इस काम में सबसे ज्यादा योगदान दिया है मीडिया ने। रात दिन जब मोदीगान किया जाएगा और ‘हम तो पूछेंगे’ के तहत जब मोदी के विरोधियों को गरिया जाएगा तो जनता में भ्रम तो फैलेगा ही। आज की तारीख में एक तरह से मीडिया मोदी की इमेज बिल्डिंग में लगा हुआ है। इसके लिए उसे भरपूर पैसा दिया जा रहा है। वह पैसे के बल पर रक्कसाओं की तरह नाच रहा है। क्यों भाई मोदी आलोचना से परे क्यों हैं? वे देवता हैं? आसमान से उतरे फरिश्ते हैं? इंसानी कमजोरियों से परे हैं? जो लोग ये समझ बैठें हैं कि मोदी की आलोचना करने से वह और ज्यादा मजबूत होंगे, गलत समझ बैठे हैं। मीडिया के इस दुष्प्रचार से बाहर निकलिए। जिस मीडिया का काम सरकार की गलत बातों को सामने लाना होता है, वह उन्हें छुपाने में लगा है। उस विकास को बढ़ा चढ़ाकर बताया जा रहा है, जो हुआ ही नहीं। सब कुछ हवा में चल रहा है। सरकार की आलोचना करने का अधिकार कोई किसी ने नहीं छीन सकता। जो आज मोदीभक्ति में लीन हैं, उनकी जब तंद्रा टूटेगी, तब तक देश का बड़ा नुकसान हो चुकेगा। हम मोदी को गरियाना तब तक नहीं छोड़ेंगे, जब तक भक्तों की आंखें नहीं खुलती और वे मोदी को गरियाना शुरू नहीं करते।

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