RSS पर जो कहा उस पर कायम, मुक़दमे के लिए तैयार – राहुल गांधी

नई दिल्ली :  आरएसएस और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बीच की लड़ाई किसी से छुपी नहीं है, वर्तमान में राहुल गांधी संघ के सबसे बड़े आलोचक बनकर उभरे हैं. लोकसभा चुनाव के समय महाराष्ट्र के सतारा में राहुल गांधी ने आरएसएस पर सीधा हमला बोलते हुए RSS को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था. पर कुछ दिन पूर्व उनके वकील व पूर्व केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा की था कि “राहुल गांधी ने ऐसा नहीं कहा था की, महात्मा गांधी की हत्या के लिए पूरी आरएसएस ज़िम्मेदार है, बल्कि उन्होंने कहा था की उनके हत्यारे आरएसएस से जुड़े हुए थे” इस बयान के बाद भाजपा व आरएसएस ने राहुल गांधी पर कोर्ट व सज़ा से डरकर ऐसा बयान देने का आरोप लगाया था. आज राहुल गांधी ने  सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह ट्रायल फेस करने को तैयार हैं. वह मानहानि का मुकदमा लड़ते रहेंगे और उन्होंने कोर्ट से ट्रायल रद्द करने की याचिका वापस ले ली है.

राहुल ने यह भी कहा कि वह आरएसएस वाले अपने बयान पर कायम हैं, थे और रहेंगे. RSS के लोगों ने महात्मा गांधी को गोली मारी, इस बयान पर वह अडिग हैं और वह अपना बयान वापस नहीं लेंगे. कोर्ट ने राहुल को पेशी में छूट देने से इनकार कर दिया है. यानी 16 नवंबर को उन्हें भिवंडी की कोर्ट में पेश होना होगा.

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई कर रहा है. राहुल गांधी ने अपने खिलाफ महाराष्ट्र की एक निचली अदालत चल रहे आपराधिक मानहानि से जुड़े एक मामले को रद्द करने की मांग की है. इससे पहले वह कोर्ट के माफी मांगने के प्रस्ताव को ठुकरा चुके हैं. राहुल की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने जो कहा वह महात्मा गांधी की हत्या के ट्रायल पर आधारित है.

दरअसल, 2014 में महात्मा गांधी की हत्या का आरोप कथित रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लगाने के संबंध में राहुल के खिलाफ मानहानि का यह मामला दाखिल किया गया था. संघ की भिवंडी इकाई के सचिव राजेश कुंटे ने आरोप लगाया था कि राहुल ने सोनाले में 6 मार्च 2014 को एक चुनावी रैली में कहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने गांधी जी की हत्या की. कुंटे ने कहा कि कांग्रेस के नेता ने अपने भाषण के जरिए संघ की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने की कोशिश की पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नाथूराम गोडसे ने गांधीजी को मारा, RSS के लोगों ने गांधीजी को मारा, इन दोनो बातों में बहुत फर्क है. जब आप किसी व्यक्ति विशेष के बारे में बोलते हैं तो सतर्क रहना चाहिए. आप किसी की सामूहिक निंदा नहीं कर सकते. हम सिर्फ यह जांच कर रहे हैं कि राहुल गांधी ने जो बयान दिए क्या वह मानहानि के दायरे में हैं या नहीं.

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